नीतीश कुमार ने रचा इतिहास: पूरा हुआ 'चारों सदनों' का सपना, बिहार के इन दिग्गज नेताओं की क्लब में हुए शामिल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब भारतीय लोकतंत्र के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद— चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है। जानें उनके इस सफर और बिहार के अन्य 'ऑलराउंडर' राजनेताओं के बारे में।

Patna - बिहार की राजनीति में 'चाणक्य' कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए चुने जाने के साथ ही एक अनूठा राजनीतिक इतिहास रच दिया है। मार्च 2026 में राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही उनका वह पुराना सपना पूरा हो गया है, जिसका जिक्र उन्होंने कई मौकों पर किया था— संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों का सदस्य बनना।

नीतीश कुमार अब उन गिने-चुने राजनेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र के चारों विधायी सदनों (लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता हासिल की है।

नीतीश कुमार: इंजीनियर से 'चारों सदनों के माननीय' तक

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में ही यह इच्छा व्यक्त की थी कि वे लोकतंत्र के हर सदन का अनुभव लेना चाहते हैं।

  • लोकसभा: वे पहली बार 1989 में बाढ़ (Barh) निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए और कुल 6 बार लोकसभा के सदस्य रहे।

  • विधानसभा: 1985 में वे पहली बार हरनौत से विधायक बने।

  • विधान परिषद: 2006 से वे लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं।

  • राज्यसभा: मार्च 2026 में उनका राज्यसभा जाना उनके विधायी करियर का अंतिम और निर्णायक पड़ाव बना।



  • बिहार के अन्य नेता जो चारों सदनों के सदस्य रहे

नीतीश कुमार इस क्लब में अकेले नहीं हैं। बिहार की धरती ने ऐसे कई कद्दावर नेता दिए हैं जिनका संसदीय अनुभव बहुत व्यापक रहा है:

1. सुशील कुमार मोदी (दिवंगत)


भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बिहार के उन पहले नेताओं में से थे जिन्होंने यह कीर्तिमान स्थापित किया।

  • विधानसभा: 1990 में पटना सेंट्रल से पहली बार विधायक बने।

  • लोकसभा: 2004 में भागलपुर से सांसद चुने गए।

  • विधान परिषद: 2006 से 2020 तक परिषद के सदस्य और नेता प्रतिपक्ष रहे।

  • राज्यसभा: 2020 में रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुई सीट से राज्यसभा पहुँचे।


  • 2. लालू प्रसाद यादव


राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का संसदीय सफर भी चारों सदनों से होकर गुजरा है:

  • लोकसभा: 1977 में सबसे युवा सांसदों में से एक के रूप में छपरा से चुने गए।

  • विधानसभा: 1980 में पहली बार विधायक बने और नेता प्रतिपक्ष रहे।

  • विधान परिषद: बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए वे परिषद के सदस्य रहे।

  • राज्यसभा: 2002 में वे राज्यसभा के सदस्य भी निर्वाचित हुए थे।


  • 3. नागमणि


पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि के नाम भी यह अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वे भी लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं।

निष्कर्ष: क्यों खास है यह उपलब्धि?

संसदीय लोकतंत्र में चारों सदनों का सदस्य होना न केवल नेता की लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह उसके गहन विधायी अनुभव का भी प्रमाण है। जहाँ विधानसभा और लोकसभा सीधे जनता के जुड़ाव (Direct Election) का केंद्र हैं, वहीं विधान परिषद और राज्यसभा (Indirect Election) नीति-निर्धारण और उच्च सदन की गरिमा का प्रतिनिधित्व करते हैं। नीतीश कुमार के लिए राज्यसभा जाना उनके सक्रिय विधायी जीवन के एक पूर्ण चक्र (Full Circle) के पूरा होने जैसा है।