हार्ट अटैक से सड़क हादसे तक… अब रात में नहीं होगी इलाज की देरी, जिला अस्पतालों में हाई अलर्ट इमरजेंसी सिस्टम लागू

Bihar Health Department:स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल पर अब राज्य के जिला अस्पतालों में रात के समय भी नियमित इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।...

अब रात में नहीं होगी इलाज की देरी- फोटो : social Media

Bihar Health Department:बिहार सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल पर अब राज्य के जिला अस्पतालों में रात के समय भी नियमित इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले का मकसद गंभीर मरीजों को वक्त पर इलाज मुहैया कराना और उन्हें पटना या दूसरे मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने की मजबूरी को कम करना है।

नई व्यवस्था के तहत अब रात में भी जिला अस्पतालों में जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, शिशु रोग और स्त्री एवं प्रसूति रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहेंगे। इनके साथ प्रशिक्षित नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीकी कर्मियों की टीम भी मौजूद रहेगी, ताकि किसी भी नाज़ुक हालात में बिना देर किए इलाज शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नई रेफरल पॉलिसी लागू करने से पहले जिला अस्पतालों की इमरजेंसी व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत किया जाएगा। अस्पतालों में जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक, आधुनिक जांच सुविधाएं और जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि मरीजों का इलाज उनके अपने जिले में ही हो सके और उन्हें इधर-उधर भटकना न पड़े।

दरअसल, विभागीय समीक्षा में सामने आया था कि कई जिला अस्पतालों में रात के वक्त विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते। नतीजतन हार्ट अटैक, सड़क हादसे, गंभीर रूप से बीमार बच्चों और गर्भवती महिलाओं जैसे मामलों में मरीजों को तत्काल बड़े अस्पतालों के लिए रवाना करना पड़ता था। इस दौरान इलाज में देरी कई बार मरीजों की हालत को और संगीन बना देती थी।

सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सबसे ज्यादा राहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों, हार्ट अटैक के मरीजों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को मिलेगी। समय पर मिलने वाला शुरुआती इलाज कई मामलों में जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय करता है।स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि जिला अस्पतालों की रात की इमरजेंसी सेवाओं की नियमित निगरानी होगी। इससे न केवल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों पर मरीजों का अनावश्यक दबाव घटेगा, बल्कि लोगों को अपने ही जिले में बेहतर, तेज और भरोसेमंद इलाज मिलने का रास्ता भी साफ होगा।