Train Confirmed Seat: अब देर भारी पड़ेगी, अब TTE नहीं करेगा इंतजार, बोर्डिंग पर समय से नहीं पहुंचे तो सीट हाथ से जाएगी , जानिए रेलवे का बदला नियम

बोर्डिंग पर समय से नहीं पहुंचे तो सीट हाथ से जाएगी- फोटो : social Media

Train Confirmed Seat: देश की सियासत में जैसे फैसले ऊपर से नीचे तक असर दिखाते हैं, उसी तर्ज पर अब रेलवे की नीतियों में भी बड़ा और निर्णायक बदलाव होने जा रहा है। ट्रेन की बोर्डिंग व्यवस्था को लेकर रेल मंत्रालय जल्द ही ऐसा सुधार लागू करने जा रहा है, जिससे यात्रियों की परेशानी कम होगी और व्यवस्था में अनुशासन कायम होगा। नए नियम के तहत अब टीटीई यात्रियों का तय बोर्डिंग स्टेशन के बाद अगले स्टेशन तक इंतज़ार नहीं करेंगे।

रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में रेल सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) को सॉफ्टवेयर में बदलाव के निर्देश जारी कर दिए हैं। नए सिस्टम के लागू होते ही, यदि कोई यात्री अपने निर्धारित बोर्डिंग स्टेशन पर ट्रेन में सवार नहीं होता है, तो टीटीई चेकिंग के दौरान ही अपने ईएफटी डिवाइस पर उस सीट को “नॉट टर्नअप” दर्ज कर देगा। जैसे ही यह सूचना सिस्टम में अपडेट होगी, उस खाली सीट पर वेटिंग या आरएसी टिकट पर यात्रा कर रहे यात्री को तत्काल सीट आवंटित कर दी जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया की खास बात यह है कि सीट आवंटन की जानकारी सीधे यात्री के मोबाइल फोन पर पहुंच जाएगी। यानी न लाइन, न सिफारिश और न ही अनिश्चितता फैसला सीधा और फौरी। फिलहाल व्यवस्था यह है कि यदि यात्री अपने बोर्डिंग स्टेशन पर नहीं आता, तो टीटीई अगले स्टेशन तक उसका इंतज़ार करते हैं। अगले स्टेशन पर भी यात्री के न आने पर ही प्रतीक्षा सूची के यात्रियों को सीट दी जाती है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि नई प्रणाली लागू होने से प्रतीक्षा और आरएसी टिकट वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। खाली सीटों का तुरंत और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे हर सीट का अधिकतम इस्तेमाल संभव हो सकेगा। पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व मुख्य परिचालन प्रबंधक राकेश त्रिपाठी के मुताबिक, यह कदम भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में एक अहम पड़ाव है, जो यात्री सुविधाओं को नई धार देगा।

आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर ट्रेन में तीन से पांच फीसदी यात्री किसी न किसी वजह से यात्रा रद्द कर देते हैं या फिर तय बोर्डिंग स्टेशन के बजाय आसपास के स्टेशनों से सवार होते हैं। ऐसे में रेलवे ने साफ संदेश दिया है कि यात्री उसी स्टेशन को बोर्डिंग स्टेशन बनाएं, जहां से वे वास्तव में सवार होना चाहते हैं। बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा चार्ट बनने के 24 घंटे पहले तक ही उपलब्ध होगी। इसके बाद न बोर्डिंग बदलेगी और न ही दूसरे स्टेशन से चढ़ने की इजाज़त मिलेगी।

कुल मिलाकर, यह फैसला रेलवे प्रशासन की उस सियासी इच्छाशक्ति को दिखाता है, जिसमें तकनीक के सहारे व्यवस्था को चुस्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना यह है कि ज़मीन पर यह डिजिटल फैसला यात्रियों के लिए कितना कारगर साबित होता है।