Bihar News : राजस्व न्यायालयों में अब 'एक जैसा मामला, एक जैसा न्याय': उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दिए सख्त निर्देश

Bihar News : राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा की 'एक जैसा मामला, एक जैसा न्याय' की सुविधा होगी. उन्होंने इसके लिए सख्त निर्देश जारी किया है....पढ़िए आगे

'एक जैसा मामला, एक जैसा न्याय- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। बुधवार को जारी बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को न्याय के लिए दर-दर भटकना न पड़े, इसके लिए राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) को और अधिक पारदर्शी और विधि-सम्मत बनाया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समान प्रकृति के मामलों में अलग-अलग स्तरों पर भिन्न निर्णय होना न्याय की मूल भावना के विपरीत है, जिसे अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पटना, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा और भागलपुर में आयोजित 'भूमि सुधार जन कल्याण संवाद' के बाद लिया गया है। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रमंडलीय आयुक्त से लेकर अंचल अधिकारी स्तर तक के न्यायालयों द्वारा समरूप मामलों में अलग-अलग आदेश पारित किए जा रहे हैं। इस असमानता के कारण आम जनता में भ्रम और असुरक्षा की स्थिति बनी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्णयों में एकरूपता लाने की कवायद शुरू की गई है।

व्यवस्था में सुधार हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा 13 जनवरी 2026 को सभी समाहर्ताओं को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, अब अर्ध-न्यायिक निर्णय लेते समय महाधिवक्ता (Advocate General) के विधिक परामर्श को मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाना होगा। हालांकि यह परामर्श बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे न्यायिक कसौटी पर खरा उतरने और आदेशों में अनावश्यक भिन्नता को समाप्त करने के लिए अनिवार्य माना गया है।

नया निर्देश यह भी स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए "जिस प्रक्रिया से निर्णय लिया गया हो, उसी प्रक्रिया से उसमें संशोधन या समाप्ति" होनी चाहिए। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि विधि विभाग द्वारा गठित अधिवक्ताओं के पैनल को किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा एकतरफा भंग करना अधिकार क्षेत्र से बाहर और मनमाना कदम माना जाएगा। ऐसे किसी भी आदेश को अवैध और अस्थिर समझा जाएगा, जो स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हों।

उपमुख्यमंत्री ने अंत में जोर देकर कहा कि सभी अर्ध-न्यायिक आदेशों में प्राकृतिक न्याय और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध आदेश पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर देना होगा। बिना ठोस आधार, अस्पष्ट या तथ्यहीन आदेश न केवल अवैध माने जाएंगे, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इस पहल से बिहार में राजस्व संबंधी विवादों के निपटारे में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।