पटना के ग्रामीण इलाकों में 'एंट्री माफिया' का आतंक: कोड वर्ड और व्हाट्सएप ग्रुप से चल रहा करोड़ों का सिंडिकेट

राजधानी के बिक्रम और रानीतालाब इलाके में 'एंट्री माफिया' का ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है जो किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम करता है। कोड वर्ड और पुलिस की लोकेशन ट्रैक करने के लिए बकायदा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं।

पटना के ग्रामीण इलाकों में 'एंट्री माफिया' का आतंक- फोटो : Reporter

राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों, विशेषकर बिक्रम और रानीतालाब में 'एंट्री माफिया' का एक बेहद खतरनाक और संगठित सिंडिकेट सक्रिय है। यह माफिया तंत्र सोन नदी से सटे इलाकों में चलने वाले अवैध बालू खनन, शराब तस्करी और ओवरलोड ट्रकों को निर्बाध रूप से पार कराने के लिए कुख्यात है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा सिंडिकेट विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस कर्मियों के नाम पर 'एंट्री फीस' (मासिक या प्रति फेरा वसूली) के रूप में करोड़ों रुपये की अवैध उगाही कर रहा है। बिना इस अवैध टैक्स को चुकाए क्षेत्र से किसी भी व्यावसायिक वाहन का गुजरना नामुमकिन हो चुका है।


आधुनिक तकनीक और कोड सिस्टम से चल रहा उगाही का हाइटेक नेटवर्क

यह सिंडिकेट किसी साधारण गिरोह की तरह नहीं, बल्कि एक बेहद कॉर्पोरेट और हाइटेक अंदाज में काम करता है। वाहनों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने के लिए माफिया द्वारा बकायदा एक विशेष “कोड“ जारी की जाती है। यही नहीं, बाकायदा रात भर नेशनल हाईवे (NH) पर पुलिस की पेट्रोलिंग और लोकेशन पर नजर रखने के लिए विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जहां अवैध वाहनों के चालकों को पल-पल की अपडेट दी जाती है। इस अवैध उगाही से मिलने वाली मोटी रकम का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय पुलिस चौकियों, थानों और परिवहन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों तक नियमित रूप से पहुंचाया जाता है, जिसके कारण यह नेटवर्क बेखौफ होकर फल-फूल रहा है।


बिना 'एंट्री' सीधे चलती है गोली, बालू के अवैध धंधे में बेखौफ गुंडागर्दी

बिक्रम और रानीतालाब के सोन तटीय इलाकों में क्षमता से अधिक वजन (ओवरलोडिंग) और बिना परमिट वाले बालू के वाहनों को शहर में प्रवेश कराने के लिए एक निश्चित राशि वसूली जाती है। इस सिंडिकेट का खौफ इस कदर है कि यदि कोई ट्रक ड्राइवर या वाहन मालिक बिना 'एंट्री फीस' दिए यहां से निकलने की हिम्मत करता है, तो माफिया के गुर्गे सड़कों पर ही तांडव शुरू कर देते हैं। बिना पैसे दिए निकलने वाले वाहनों में तोड़फोड़ करना, चालकों के साथ बेरहमी से मारपीट करना और विरोध करने पर सरेआम गोलीबारी जैसी हिंसक घटनाओं को अंजाम देना इन अपराधियों के लिए आम बात हो चुकी है।


पुलिस टीम पर भी हमलावर हुए बालू माफिया, सेटिंग के वीडियो वायरल

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल हैं, क्योंकि अक्सर इन माफियाओं और स्थानीय पुलिसकर्मियों के बीच गहरी मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों और अवैध माफियाओं के बीच की 'सेटिंग' के कई चैट और वीडियो भी वायरल हो चुके हैं। हताशा की बात यह है कि जब कभी ईमानदार अधिकारी इन पर कार्रवाई की कोशिश करते हैं, तो ये बेखौफ अपराधी पुलिस टीम पर भी पत्थरबाजी और फायरिंग करने से बाज नहीं आते। ऐसी हिंसक घटनाओं ने अब इलाके में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है।

रिपोर्ट - ऋषिकेश कुमार