पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ₹1.31 करोड़ की बिजली चोरी के आरोपी की सजा रद्द, पुलिस और विभाग की जांच पर उठाए सवाल
पटना हाईकोर्ट ने बिजली चोरी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एक करोड़ 31 लाख रुपये से अधिक की चोरी के आरोपी को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट का फैसला बिजली विभाग के लिए बड़ा झटका है।
Patna - : पटना हाईकोर्ट ने बिजली चोरी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एक करोड़ 31 लाख रुपये से अधिक की चोरी के आरोपी को बरी कर दिया है। जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की एकलपीठ ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। कोर्ट ने गया की विशेष विद्युत अदालत द्वारा सुनाई गई तीन साल की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा को निरस्त करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की है।
निचली अदालत के फैसले को दी गई थी चुनौती
गया के विशेष न्यायाधीश (विद्युत) ने अपीलकर्ता मो. मकसूद आलम को विद्युत अधिनियम, 2007 की धारा 135(1) के तहत दोषी करार दिया था। विशेष अदालत ने उसे तीन साल की कैद, 5,000 रुपये जुर्माना और बिजली विभाग को हुए ₹1,31,33,664 के नुकसान की भरपाई का आदेश दिया था। इस आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए सजायाफ्ता ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया में पाईं गंभीर खामियां
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की पीठ ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपना केस स्थापित करने में बुरी तरह विफल रहा। अदालत ने इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया कि इतने बड़े वित्तीय मामले में अनुसंधानकर्ता (IO) तक की गवाही नहीं कराई गई। साक्ष्यों की इसी कमी को देखते हुए अदालत ने निचली अदालत के सजा के आदेश को रद्द कर दिया।
बिना उपस्थिति और पुख्ता सबूत के बनाया गया अभियुक्त
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि छापेमारी के वक्त अपीलकर्ता मौके पर मौजूद नहीं था। उसे महज एक व्यक्ति, अनिल पांडेय, के बयान के आधार पर आरोपी बना दिया गया था। विडंबना यह रही कि पुलिस ने जांच के बाद अनिल पांडेय को क्लीन चिट देते हुए उसका नाम ट्रायल के लिए नहीं भेजा, जबकि उसी के बयान पर मुख्य अभियुक्त की पहचान तय की गई थी।
परिसर की बिजली पहले से ही थी कटी
बचाव पक्ष ने दलील दी, जिसे कोर्ट ने संज्ञान में लिया, कि बिजली बिल का भुगतान न होने के कारण संबंधित परिसर का कनेक्शन पहले ही काट दिया गया था। ऐसे में करोड़ों की बिजली चोरी का आरोप बिना ठोस भौतिक साक्ष्यों के टिकाऊ नहीं पाया गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपीलकर्ता को सभी आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया।