Bihar bank strike: 5-डे वर्क वीक की मांग पर देशभर में सरकारी बैंक बंद, कामकाज ठप

Bihar bank strike: देशभर में सरकारी बैंकों के कर्मचारी 5-डे वर्क वीक की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। UFBU के आह्वान से SBI, PNB समेत कई बैंक प्रभावित, ग्राहकों को परेशानी।

Bihar bank strike
देशभर में सरकारी बैंक बंद- फोटो : social media

Bihar bank strike: देशभर के पब्लिक सेक्टर बैंकों में मंगलवार (27 जनवरी 2026) को कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर बैंक कर्मचारी 5-डे वर्क वीक की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए। इस हड़ताल का असर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत सभी सरकारी बैंकों में देखने को मिला।हड़ताल के कारण नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस, पासबुक अपडेट और काउंटर से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं ठप रहीं। बैंक शाखाओं में सन्नाटा पसरा रहा और ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

क्यों बुलानी पड़ी बैंक यूनियनों को हड़ताल

UFBU, जो कि नौ बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, ने यह हड़ताल तब बुलाई जब 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही। यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को टाला जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। बैंक यूनियनों की मुख्य मांग है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों में भी सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू की जाए और शनिवार को अवकाश दिया जाए।

निजी बैंक खुले रहे, सरकारी बैंक रहे बंद

हड़ताल का असर केवल सरकारी बैंकों तक सीमित रहा। HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे निजी बैंकों में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा, क्योंकि उनके कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल नहीं थे। हालांकि सरकारी बैंकों पर निर्भर ग्राहकों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी।

5-डे वर्क वीक पूरी तरह जायज– बैंक अधिकारी संगठन

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी ने कहा कि देश की कई अहम वित्तीय संस्थाएं पहले से ही पांच दिवसीय कार्य प्रणाली पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक, एलआईसी, जीआईसी और शेयर बाजार में यह व्यवस्था पहले से लागू है, ऐसे में बैंकों को इससे अलग रखना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूनियनों ने यह प्रस्ताव रखा है कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम किया जा सकता है, ताकि कुल कार्य घंटे कम न हों और ग्राहकों को कोई नुकसान न हो।

बिहार में हड़ताल का ज्यादा असर, ATM भी हुए खाली

बिहार के कई जिलों में हड़ताल का असर ज्यादा देखने को मिला। पटना, मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में कई एटीएम खाली हो गए, जिससे पेंशनर्स और आम लोगों को काफी परेशानी हुई। बैंक शाखाओं के बाहर दिनभर सन्नाटा छाया रहा। मुजफ्फरपुर में UFBU के जिला संयोजक मनोरंजनम, उप संयोजक पंकज ठाकुर और अन्य यूनियन नेताओं ने प्रदर्शन कर सरकार से मांगों पर तुरंत फैसला लेने की अपील की।

बढ़ता काम का दबाव और मानसिक तनाव बना मुद्दा

पटना की एक सरकारी बैंक कर्मचारी रीतिका ने बताया कि बैंकों में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं को लागू करने में बैंक कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है, लेकिन इसके बावजूद उनकी कार्य परिस्थितियों और मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनका कहना था कि 5-डे वर्क वीक कर्मचारियों की सेहत और कार्य-जीवन संतुलन के लिए जरूरी है। अगर सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए

हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं बाधित रहने से ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का अधिक से अधिक उपयोग करें। जरूरी बैंकिंग कार्यों को हड़ताल के बाद निपटाने की कोशिश करें और एटीएम से नकद निकालने से पहले कैश की उपलब्धता की जानकारी जरूर लें।