भागलपुर के उस 'खूनी मंजर' की यादें ताजा: दोहरे हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे कैदी को राहत, हाईकोर्ट से मिली हरी झंडी

भागलपुर के नाथनगर में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में सजा काट रहे चितरंजन यादव को पटना हाईकोर्ट ने राहत देते हुए जमानत दे दी है।

Patna : पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर जिले के नाथनगर ललमटिया स्थित दिलदार टोला में हुए भीषण गैंगवार और दोहरे हत्याकांड मामले में एक अभियुक्त चितरंजन यादव को बड़ी राहत दी है। जस्टिस मोहित कुमार साह एवं जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने अभियुक्त की सजा को निलंबित (Suspend) करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

क्या था मामला?

यह मामला 6 फरवरी 2007 का है, जब भागलपुर के नाथनगर ललमटिया में दो गुटों के बीच खूनी गैंगवार हुआ था। जानकारी के अनुसार, संजय यादव नामक अपराधी एक अन्य मुकदमे में जमानत पर छूटकर आया ही था कि दूसरे गुट के दर्जनों अपराधियों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया। इसी बीच, बचाव में आए दूसरे गुट के अपराधी क्रांति महतो की भी फायरिंग में हत्या कर दी गई थी। इस गैंगवार में शंकर यादव, मुनेश्वर यादव और हर्षिल यादव समेत कई अन्य अपराधियों के नाम सामने आए थे। अधिवक्ता की दलील: 'भीड़ का हिस्सा बताकर फंसाया गया'

अपीलार्थी चितरंजन यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता  दीपक कुमार सिन्हा ने कोर्ट के समक्ष पुरजोर बहस की। उन्होंने दलील दी कि चितरंजन यादव को इस कांड में गलत तरीके से फंसाया गया है और उनका इस हत्याकांड से सीधा कोई लेना-देना नहीं है। प्राथमिकी में नाम होने के बावजूद, गवाहों ने उनके खिलाफ आरोपों का समर्थन नहीं किया है। आरोप के अनुसार भी वह केवल 'भीड़ का सदस्य' मात्र थे, लेकिन निचली अदालत ने उन्हें अन्य पेशेवर अपराधियों के साथ आजीवन कारावास की सजा सुना दी।

3 साल से अधिक समय से जेल में बंद थे चितरंजन

कोर्ट को बताया गया कि चितरंजन यादव पिछले तीन साल तीन महीने से जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों और मामले के तथ्यों को सुनने के बाद सजा को निलंबित करना उचित समझा और अपीलार्थी को जमानत दे दी। इस फैसले से 19 साल पुराने इस आपराधिक मामले में एक नया मोड़ आया है। फिलहाल पुलिस इस गैंगवार से जुड़े अन्य पहलुओं और नेटवर्क पर अपनी निगरानी बनाए हुए है।