Patna Highcourt : पटना हाईकोर्ट ने झूठा हलफनामा देकर 8 साल पहले ली गई अग्रिम जमानत किया रद्द, बेल बॉन्ड भी किया निरस्त

Patna Highcourt : पटना हाईकोर्ट ने एक कड़े फैसले से यह स्पष्ट कर दिया है कि अदालत के समक्ष झूठ बोलकर या गुमराह करके राहत पाना संभव नहीं है.......पढ़िए आगे

पटना हाईकोर्ट सख्त - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट  के एक कडे निर्णय  से यह पूरी तरह स्पष्ट  हो गया कि कोर्ट के नजरों से बचना इतना आसान नहीं हैं। कोर्ट के समक्ष झूठा हलफनामा देकर अग्रिम जमानत पाने वाले एक आरोपी का कानूनी खेल आखिरकार 8 साल बाद बेनकाब हो गया। आरोपी अमित कुमार (अमित कुमार सहनी) ने आठ साल पहले शपथ पत्र पर झूठा बयान देकर अग्रिम जमानत हासिल कर ली थी। आरोपी का सोचना था कि समय बीतने के साथ सब खत्म  हो जाएगा। 

आरोपी पक्ष ने दलील दी कि  एफआईआर तो साथ में लगाई ही थी और पिछले 8 सालों में कोई नई गड़बड़ी या बदमाशी भी नहीं की है, इसलिए अब मामला समाप्त समझा जाए। जस्टिस संदीप कुमार की सिंगल बेंच इस दलील से जरा भी प्रभावित नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कोर्ट के सामने कसम खाकर बोला गया झूठ किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 8 साल का लंबा समय बीत जाना या बाद में 'शरीफ' बने रहना किसी भी धोखे से हासिल किए गए जमानत आदेश को सही नहीं ठहरा सकता। 

कोर्ट ने न सिर्फ 8 साल पुरानी अग्रिम जमानत रद्द कर दी, बल्कि आरोपी के बेल बॉन्ड भी निरस्त कर दिए। कोर्ट से चालाकी दिखाकर राहत पाने की कोशिश करने वालों के लिए यह एक कड़ा सबक है। कानून के हाथ लंबे जरूर होते हैं, पर उनकी नजरें भी उतनी ही तेज होती हैं।

कोर्ट का स्पष्ट मानना था कि कोर्ट  के समक्ष होशियारी या झूठे तथ्यों  को प्रस्तुत कर लाभ उठाना कभी मान्य नहीं  हो सकता है। कितना भी पुराना मामला हो या व्यक्ति का में बाद  में ट्रैक रिकॉर्ड  कितना ही सही हो,लेकिन  कोर्ट को गलत रिकॉर्ड या जानकारी दे लाभ लेने का मामला अस्वीकार्य हैं।