कोइलवर मेंटल हॉस्पीटल पहुंचे पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, बदहाली देख भड़के, स्वास्थ्य सचिव और DGP को किया तलब
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में मानसिक रोगियों के इलाज की बदतर स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू ने कोइलवर मानसिक अस्पताल के निरीक्षण के बाद राज्य सरकार को फटकार लगाई और स्वास्थ्य सचिव सहित डीजीपी को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश ह
Patna - पटना हाईकोर्ट ने बिहार में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस मामले को जनहित में स्वयं संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है।
कोइलवर मानसिक अस्पताल की स्थिति देख भड़के जज
14 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू, हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीशों, रजिस्ट्रार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भोजपुर जिले के कोइलवर स्थित बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड एलाइड साइंस का निरीक्षण किया था। वहां की अव्यवस्था और संसाधनों की भारी कमी देख कोर्ट ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार जैसी विशाल जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार वाले राज्य में मानसिक रोगों के इलाज की वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह नाकाफी है।
बालसा की रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल
अदालत ने बालसा (BALSA) के सदस्य सचिव द्वारा 17 फरवरी 2026 को पेश की गई रिपोर्ट को बेहद गंभीरता से लिया है। रिपोर्ट में राज्य के भीतर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञों की भारी कमी को उजागर किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लावारिस मानसिक रोगियों के लिए हर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में इलाज की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
16 मार्च को अधिकारियों की 'वर्चुअल' पेशी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई में बिहार के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया है। 16 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सचिव, कोइलवर संस्थान के निदेशक, बिहार के डीजीपी और आईजी (कारा) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।