शराबबंदी पर हाईकोर्ट की खरी-खरी: 19 साल के युवक को दी जमानत, मुख्य सचिव से पूछा- युवाओं के पुनर्वास के लिए क्या कर रही सरकार?
पटना हाईकोर्ट ने एक शराब मामले में 19 वर्षीय आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए राज्य सरकार को आईना दिखाया है। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा कि शराबबंदी के बावजूद युवा नशे के अवैध कारोबार का शिकार हो रहे हैं और इसके लिए ठोस पुनर्वास नीतियों की जरूरत है।
Patna - पटना हाईकोर्ट ने राज्य में शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत और युवाओं पर इसके दुष्प्रभावों को लेकर एक बार फिर तल्ख टिप्पणी की है। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने गोपालगंज के एक मामले में सुनवाई करते हुए न केवल आरोपी को राहत दी, बल्कि सरकार को कड़े निर्देश भी जारी किए।
युवाओं के भविष्य और अवैध कारोबार पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य में शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाबंदी के बावजूद बिहार में अवैध शराब का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। कोर्ट ने विशेष रूप से चिंता जताई कि 18 से 35 वर्ष की आयु के युवा इस अवैध धंधे और नशे की चपेट में आ रहे हैं। मिथाइल अल्कोहल युक्त जहरीली शराब के घातक परिणामों का जिक्र करते हुए अदालत ने इसे एक गहरा सामाजिक संकट करार दिया।
क्या था मामला?
यह मामला गोपालगंज जिले के विशंभरपुर थाना (कांड संख्या 25/2025) से जुड़ा है। प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस ने मटिहानिया पुल के पास एक लावारिस मोटरसाइकिल (BR29R2228) से 55.800 लीटर अवैध शराब बरामद की थी। चूंकि वाहन 19 वर्षीय कृपा साहनी के नाम पर पंजीकृत था और चौकीदार के बयान में उसका नाम आया, इसलिए उसे आरोपी बनाया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि घटना के समय आरोपी मौके पर नहीं था और वाहन कोई और चला रहा था।
मुख्य सचिव को निर्देश और जमानत की शर्तें
अदालत ने इस मामले में आरोपी को राहत देते हुए निम्नलिखित आदेश जारी किए:
अग्रिम जमानत : आरोपी को 10 हजार रुपये के मुचलके पर अग्रिम जमानत दे दी गई, बशर्ते वह चार सप्ताह के भीतर निचली अदालत में समर्पण कर दे।
पुनर्वास के निर्देश : कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि शराब के अवैध धंधे में फंसे युवाओं के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
संवैधानिक मर्यादा : अदालत ने जोर दिया कि सरकार को अनुच्छेद 47 की भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन स्तर को सुधारने की बात करता है।