हसनपुर रोड रेलवे साइडिंग मामले में पटना हाई कोर्ट ने खारिज की रिट याचिका, जानिए क्या है मामला

मामले की सुनवाई जस्टिस श्रीमती जी. अनुपमा चक्रवर्ती की एकल पीठ ने की।कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ताओं ने रेलवे के किसी विशिष्ट आदेश या कार्रवाई को चुनौती नहीं दी है, बल्कि केवल सामान्य दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

Patna High Court - फोटो : news4nation

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने समस्तीपुर मंडल अंतर्गत हसनपुर रोड रेलवे साइडिंग पर शेड, प्लेटफॉर्म, गोदाम, लाइट और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि रेलवे साइडिंग की अवसंरचनात्मक कमियों के आधार पर सामान्य दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।  


यह मामला मैसर्स गणपति ट्रेडर्स  तथा हसनपुर के अन्य थोक मक्का व खाद्यान्न व्यापारियों द्वारा वर्ष 2014 में दायर किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गौतम केजरीवाल ने तर्क दिया था कि साइडिंग पर उचित शेड, लाइट, सुरक्षा और गोदाम न होने के कारण बारिश व रात के समय माल चढ़ाने और उतारने  में भारी समस्याएं आती हैं।


 इसके कारण रैक (मालगोदाम ट्रेन) में देरी होती है और रेलवे उनसे मनमाना विलंब शुल्क (Demurrage and Wharfage charges) वसूलती है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत व्यापार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया था।  


हाईकोर्ट का रुख और फैसला

मामले की सुनवाई जस्टिस श्रीमती जी. अनुपमा चक्रवर्ती  की एकल पीठ ने की।कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ताओं ने रेलवे के किसी विशिष्ट आदेश या कार्रवाई को चुनौती नहीं दी है, बल्कि केवल सामान्य दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।  रिट अधिकार क्षेत्र  में सिर्फ दावों और बयानों के आधार पर इस तरह के निर्देश नहीं दिए जा सकते। यह याचिका जनहित याचिका के रूप में नहीं दायर की गई थी और न ही याचिकाकर्ता ऐसा कोई पर्याप्त तथ्य पेश कर सके, जिससे उनके मौलिक अधिकारों के हनन की पुष्टि हो सके।  


रेलवे की ओर से दलील दी गई कि रेलवे नियमों के अनुसार निर्धारित समय से अधिक मालगाड़ी रोकने पर ही शुल्क लिया जाता है और व्यापारियों के पास इन शुल्कों की माफी/छूट के लिए रेलवे नियमों के तहत अलग से आवेदन करने का विकल्प मौजूद है। हाईकोर्ट ने सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुए याचिका को आधारहीन मानते हुए रद्द कर दिया।