शराब बरामदगी के 2 साल बाद घर सील करना पुलिस की 'मनमानी', सरकार पर 50 हजार का जुर्माना, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

शराबबंदी कानून की आड़ में अधिकारियों द्वारा की गई मनमानी कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। जस्टिस अरुण कुमार झा ने जहानाबाद की नीलम कुमारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया

Patna : पटना हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार झा ने जहानाबाद की नीलम कुमारी द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों पर ₹50,000 का हर्जाना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शराब बरामदगी के दो साल बाद किसी आवासीय परिसर को सील करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि कानून की शक्तियों का दुरुपयोग भी है।

क्या है पूरा मामला?

नीलम कुमारी के स्वामित्व में जहानाबाद के हनुमान नगर में एक आवासीय मकान है। 6 अक्टूबर, 2019 को पुलिस ने इस मकान पर छापा मारकर नीलम के बेटे के पास से 8.5 लीटर विदेशी शराब बरामद की थी। इस मामले में जहानाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस अनुसंधान में मकान मालकिन नीलम की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई थी।

दो साल बाद पुलिस की 'अचानक' कार्रवाई

मामला तब और पेचीदा हो गया जब शराब बरामदगी के लगभग दो साल बाद, 31 जनवरी, 2022 को पुलिस ने अचानक नीलम के मकान पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया। याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि यदि परिसर के मालिक की अपराध में कोई संलिप्तता नहीं है, तो मकान को सील या राज्यसात (Confiscate) नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और आदेश

जस्टिस अरुण कुमार झा ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शराब बरामदगी के इतने लंबे अंतराल के बाद शराबबंदी कानून का प्रयोग कर मकान सील करना किसी भी कानून के तहत उचित नहीं है। कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश दिए:

याचिकाकर्ता के मकान को शीघ्र रिलीज करने का निर्देश दिया।

मनमाने ढंग से कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के आचरण को देखते हुए राज्य सरकार पर ₹50,000 का हर्जाना लगाया।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि दाखिल-खारिज और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार नीलम ही मकान की वैध मालिक हैं।