Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने बक्सर जेल ब्रेक मामले में बर्खास्त जेल वार्डर को दी राहत, सेवामुक्ति का आदेश किया रद्द

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने बक्सर सेंट्रल जेल ब्रेक मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बर्खास्त जेल वार्डर उपेंद्र दास की सेवामुक्ति के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

जेल वार्डर को राहत- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बड़ा निर्णय देते हुए बक्सर जेल ब्रेक मामले में बर्खास्त वार्डर को मिली राहत दिया  व सेवामुक्ति का आदेश रद्द कर दिया।दिसंबर 2016 में बक्सर सेंट्रल जेल से पांच कैदियों के फरार होने के बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय दिया है।कोर्ट ने उत्तर चक्र  के दफा इंचार्ज व जेल वार्डर उपेंद्र दास की सेवामुक्ति  के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। 

जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार और जेल प्रशासन की पूरी विभागीय जांच प्रक्रिया को प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण और गैर-कानूनी करार दिया। 30 और 31 दिसंबर, 2016 की मध्य रात्रि बक्सर सेंट्रल जेल के वार्ड नंबर 29 की खिड़की और दीवार तोड़कर पांच खतरनाक कैदी फरार हो गए थे। उक्त घटना के वक्त वार्डर उपेंद्र दास ड्यूटी पर तैनात थे। जेल प्रशासन ने उन पर लापरवाही और कैदियों को भगाने में मदद करने का आरोप लगाते हुए तुरंत निलंबित कर दिया और 19 जनवरी ,2018 को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। मामलें पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि विभाग ने बिना किसी ठोस सबूत और गवाहों के सिर्फ अनुमानों और रिपोर्टों के आधार पर इतना बड़ा निर्णय ले लिया था।

कोर्ट ने अपने निर्णय में मुख्य रूप से इन खामियों को रेखांकित किया। बिहार सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 का उल्लंघन करते हुए किसी भी मुख्य गवाह (जैसे जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक या थाना प्रभारी) का मौखिक बयान दर्ज नहीं कराया गया।  केवल कागजी रिपोर्ट पेश कर दी गईं, लेकिन उनकी सच्चाई साबित करने के लिए कोई गवाही नहीं हुई। 

सर्वोच्च न्यायालय के मामलों  का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या अनुमान कभी भी कानूनी सबूत का विकल्प नहीं हो सकता। इसके जांच अधिकारी और अनुशासनिक अथॉरिटी ने जेल मैनुअल की उन धाराओं  870(ii) एवं 830(ii)) का हवाला दिया, जो वार्डर पद के कर्मचारियों पर लागू ही नहीं होतीं। डीएम और एसपी की संयुक्त रिपोर्ट में खुद इस बात का जिक्र था कि जेल में बिजली, लाइट और सुरक्षाकर्मियों की भारी कमी थी। विभाग इन बुनियादी कमियों को छिपाकर पूरी जवाबदेही अकेले वार्डर पर नहीं डाल सकता। 3 महीने में बहाल करने का आदेश पारित करते हाईकोर्ट ने महानिरीक्षक (कारा एवं सुधार सेवाएं, बिहार) द्वारा पारित बर्खास्तगी आदेश और अपीलीय आदेश दोनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उपेंद्र दास को सभी सेवानिबंधों के साथ पुनः सेवा में बहाल किया जाए। बर्खास्तगी की अवधि के दौरान के वेतन और सेवा लाभों का निपटारा तीन महीने के भीतर पूरा करने का सख्त आदेश जारी किया गया है।