पुलिस की मदद से बेटी का 'अपहरण'? दामाद की याचिका पर पटना हाईकोर्ट सख्त, ससुराल वालों को नोटिस, सरकार से मांगा जवाब

पटना हाईकोर्ट ने एक पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि बालिग पत्नी को उसके पिता द्वारा अवैध हिरासत में रखना गलत है। कोर्ट ने इस मामले में जिलाधिकारी से जवाब तलब किया है।

Patna - प्रेम विवाह के बाद पत्नी को पिता द्वारा जबरन ले जाने और अवैध हिरासत में रखने के एक मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने याचिकाकर्ता बंटी कुमार द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह संबंधित जिलाधिकारी (DM) की ओर से इस मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करे। 

पुलिस की मदद से जबरन ले जाने का आरोप

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आशुतोष कुमार पांडेय ने खंडपीठ को बताया कि बंटी कुमार का विवाह 3 दिसंबर, 2025 को संपन्न हुआ था। आरोप है कि विवाह के तुरंत बाद लड़की के पिता ने स्थानीय पुलिस की कथित मदद से उसे जबरन अपने साथ ले लिया। तब से पत्नी लापता है और पति का उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। 

बालिग होने पर कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पत्नी का मैट्रिक प्रमाणपत्र पेश किया गया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि दोनों पक्ष बालिग हैं। अभिलेखों के अवलोकन के बाद जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रितेश कुमार की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि बालिग पत्नी को उसके पिता द्वारा अवैध हिरासत में रखना कानूनन उचित नहीं है। 

जिलाधिकारी को देना होगा हलफनामा

अदालत ने निजी प्रतिवादियों (पिता और अन्य) को नोटिस जारी करने के साथ-साथ सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च, 2026 को होगी, जिसमें जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।