पटना हाईकोर्ट में 'डिजिटल न्याय' पर संकट: खराब इंटरनेट के खिलाफ PIL दायर; अधिवक्ता बोले- बिना वाई-फाई मौलिक अधिकारों का हनन!
पटना हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट परिसर और प्रत्येक कोर्ट रूम में समयबद्ध तरीके से उच्च गति (High-Speed) की इंटरनेट कनेक्टिविटी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
Patna - पटना हाईकोर्ट में ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई के दौर में 'कमजोर इंटरनेट' एक बड़ी बाधा बन गया है। अधिवक्ता ओम प्रकाश द्वारा दायर एक जनहित याचिका में कोर्ट परिसर और कोर्ट रूम में हाई-स्पीड वाई-फाई की मांग करते हुए इसे मौलिक अधिकारों से जोड़ा गया है।
हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई की मांग
अधिवक्ता ओम प्रकाश ने पटना हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट परिसर और प्रत्येक कोर्ट रूम में समयबद्ध तरीके से उच्च गति (High-Speed) की इंटरनेट कनेक्टिविटी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि आधुनिक न्यायिक प्रणाली के लिए इंटरनेट अब एक विलासिता नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता है।
'डिजिटल कोर्ट' के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर
याचिका में कहा गया है कि पटना हाईकोर्ट ने ई-कोर्ट प्रणाली, वर्चुअल हाइब्रिड सुनवाई, ऑनलाइन कॉज लिस्ट और ई-फाइलिंग जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म तो अपना लिए हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा गायब है। वर्तमान में उपलब्ध इंटरनेट सेवा अत्यंत अपर्याप्त है, जो कोर्ट रूम और गलियारों में न के बराबर काम करती है। इसके कारण डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम और ई-फाइलिंग पोर्टल तक पहुंचने में बार-बार व्यवधान उत्पन्न होता है।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला
अधिवक्ता ओम प्रकाश ने अपनी याचिका में दलील दी है कि निर्बाध इंटरनेट की अनुपस्थिति न्याय के सुचारू और कुशल प्रशासन में गंभीर बाधा डालती है। उन्होंने इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। याचिका में मांग की गई है कि डिजिटल सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए एक व्यापक सुरक्षा और रखरखाव नीति तैयार की जाए।
अधिकारियों की उदासीनता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिहार सरकार और हाईकोर्ट के महानिबंधक (Registrar General) मौजूदा खराब परिस्थितियों से पूरी तरह अवगत हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की निरंतर निष्क्रियता और उदासीनता बनी हुई है। वकीलों द्वारा झेली जा रही तकनीकी कठिनाइयों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, जिससे अदालतों के कामकाज की गति प्रभावित हो रही है और वादकारियों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।
न्याय प्रक्रिया में आ रही गंभीर बाधाएं
इंटरनेट न होने के कारण वर्चुअल सुनवाई के दौरान वीडियो और ऑडियो का बार-बार कटना, डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच न पाना और ऑनलाइन केस लिस्ट अपडेट न होना आम बात हो गई है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि जब तक कोर्ट परिसर में निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित नहीं होती, तब तक 'डिजिटल इंडिया' और 'ई-कोर्ट' का उद्देश्य पूरी तरह सफल नहीं हो सकता।