पटना हाईकोर्ट का बड़ा प्रहार: 16 साल बाद आर्म्स एक्ट में सजा रद्द, पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट ने उठाए तीखे सवाल

पटना हाईकोर्ट ने आर्म्स एक्ट और चोरी की संपत्ति रखने के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 7 साल की सजा को रद्द कर दिया है।

Patna - गोपालगंज जिले के एक पुराने मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को 'संदेह से परे' साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2006 का है, जो गोपालगंज जिले के कटेया थाना (कांड संख्या 74/2006) से जुड़ा है। इसमें धमलु पांडेय उर्फ अजय कुमार पांडेय पर अवैध हथियार और चोरी का सामान रखने का आरोप था। वर्ष 2009 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं और आईपीसी की धारा 414 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की सजा?

जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की बेंच ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कई गंभीर खामियों को उजागर किया:

  • गवाहों की कमी: बरामदगी सूची के दोनों स्वतंत्र गवाहों की अदालत में परीक्षा नहीं कराई गई।

  • आईओ की अनुपस्थिति: मामले के जांच अधिकारी (IO) को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया, जिससे बचाव पक्ष को अपनी दलीलें रखने में बाधा हुई।

  • फायरिंग टेस्ट का अभाव: हथियारों की केवल भौतिक जांच की गई थी। कोर्ट ने कहा कि बिना फायरिंग टेस्ट के हथियारों को 'कार्यशील' (In working condition) मानना गलत है।

  • यांत्रिक आदेश: अदालत ने पाया कि मामले में सैंक्शन (मंजूरी) आदेश बिना दिमाग लगाए, केवल यांत्रिक ढंग से पारित किया गया था।


अदालत का अंतिम फैसला

इन सभी विसंगतियों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 2009 के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए उसे सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया।