दहेज केस में पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बहू की याचिका पर सास के खिलाफ केस खारिज

पटना हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सास के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। जस्टिस सौरेन्द्र पांडेय की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अस्पष्ट आरोपों के आधार पर ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों को कानूनी प्रक्रि

Patna - पटना हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक चर्चित मामले में ससुराल पक्ष को बड़ी राहत देते हुए सास के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। जस्टिस सौरेन्द्र पांडेय की एकलपीठ ने क्रिमिनल मिसलेनियस संख्या 140/2025 पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवादों में बिना किसी ठोस साक्ष्य के केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर परिवार के सदस्यों को कानूनी प्रक्रिया में घसीटना उचित नहीं है।

यह मामला औरंगाबाद जिले के महिला थाना कांड संख्या 61/2023 से जुड़ा है, जहाँ परिवादिनी सिमरन कुमारी ने अपने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का दावा था कि 28 जून 2023 को विवाह के समय 30 लाख रुपये नकद और आभूषण दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद पति सनी कुमार और सास सुमित्रा देवी द्वारा मोटरसाइकिल व हीरे की अंगूठी की अतिरिक्त मांग की गई। मांग पूरी न होने पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 498ए और दहेज निषेध अधिनियम के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया था।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि सास सुमित्रा देवी के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से सामान्य और निराधार हैं, जिनका उद्देश्य केवल परिवार को परेशान करना है। माननीय न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के 'दारा लक्ष्मी नारायण बनाम तेलंगाना राज्य' के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वैवाहिक कलह के मामलों में रिश्तेदारों को केवल अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने पाया कि मामले में सास की सीधी संलिप्तता के कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।

परिणामस्वरूप, जस्टिस सौरेन्द्र पांडेय की पीठ ने सुमित्रा देवी के विरुद्ध निचली अदालत द्वारा 2 अप्रैल 2024 को लिए गए संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया और याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय के इस फैसले को वैवाहिक विवादों में झूठे आरोपों और परिजनों के अनावश्यक उत्पीड़न को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मामले के अन्य आरोपियों पर कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी।