जेडीयू नेता की सुरक्षा हटाने पर पटना हाईकोर्ट सख्त: बिहार सरकार को लगाई फटकार, 3 हफ्ते में माँगा जवाब

पटना हाईकोर्ट ने जेडीयू नेता शिशुपाल भारती (शिसूपाल यादव) की सुरक्षा और बॉडीगार्ड हटाए जाने के मामले में बिहार सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।

Patna - पटना हाईकोर्ट  ने जेडीयू नेता शिशुपाल भारती उर्फ शिशुपाल यादव को बॉडीगार्ड मुहैया करने के मामले पर सुनवाई की। अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा द्वारा दायर क्रिमिनल रिट की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण कुमार झा ने बिहार सरकार को फटकार लगाया।कोर्ट ने तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

 कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिका के सभी तथ्यों का विस्तृत जवाब देने को कहा है।अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बतलाया कि दिनांक 4 नवंबर, 2019को भागलपुर के उर्दू बाज़ार थाना तातारपुर के चिरंजीबी प्रसाद यादव उर्फ धुरी यादव की हत्या गोली मार कर कर दी।ये सूचक का बड़ा भाई था। ये इलाके के कुख्यात अपराधियों के गिरोह ने भूमि विवाद में कर दी। इसमें याचिकाकर्ता प्राथमिकी के सूचक हैं।

अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा ने आगे कोर्ट को बतलाया कि याचिकाकर्ता शिशुपाल भारती उर्फ शिशुपाल यादव को पुलिस के रिपोर्ट के आधार पर घटना के बाद से ही लगातार सुरक्षा हेतु बॉडीगार्ड निःशुल्क मिला हुआ है।  श्री सिन्हा ने बतलाया कि सेम थाना कांड का 2 सेशन ट्रायल चल रहा है, जिसमें से एक में सूचक की गवाही हो चुकी है ,लेकिन दूसरे में गवाही बाकी है। सूचक को अपनी हत्या किए जाने की आशंका है और इसी अभिप्राय की अनुशंसा पुलिस रिपोर्ट में भी है। 

डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज,भागलपुर सह अध्यक्ष गवाह सुरक्षा प्राधिकार ने भी हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया है।  बाबजूद इसके याचिकाकर्ता के बॉडीगार्ड को बिहार सरकार ने वापस बुला लिया है। कारण यह बताया जा रहा है की सुरक्षा बल की कमी है।याचिकाकर्ता जेडीयू, बिहार प्रदेश सलाहकार समिति के सदस्य है और सामाजिक गतिविधियों में उन्हें बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में जाना पड़ता है, बिना बॉडीगार्ड के कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है।

 दर्जनों अपराधों के चार अभियुक्तों का बेल बॉन्ड भी निचली अदालत ने रद्द कर दिया है ।इसलिए याचिकाकर्ता के जीवन पर खतरा और प्रबल हो जाता है।अधिवक्ता श्री दीपक कुमार सिन्हा ने इन परिस्थितियों  में बॉडीगार्ड की सुविधा का विस्तार करने की प्रार्थना कोर्ट से की है।