पटना हाईकोर्ट का हंटर: डीएफओ प्रद्युम्न गौरव को तत्काल पद से हटाने का आदेश, मनमानी नीलामी पर बिफरे जज

पटना हाईकोर्ट ने रोहतास के तत्कालीन जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) की कार्यशैली पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी से मुक्त करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारी के आचरण को 'मनमाना' करार देते हुए विभाग को उन्हें मुख्यालय

पटना हाईकोर्ट का हंटर: डीएफओ प्रद्युम्न गौरव को तत्काल पद से

Patna - जस्टिस संदीप कुमार ने 18 रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए रोहतास के तत्कालीन डीएफओ प्रद्युम्न गौरव के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। मामला 18 भारी वाहनों की जब्ती और उनकी नीलामी से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि जब इन वाहनों की रिहाई से संबंधित याचिकाएं न्यायालय में विचाराधीन थीं, तब अधिकारी ने बिना विवेकपूर्ण विचार के और बिना कोर्ट को सूचित किए जल्दबाजी में वाहनों को कम कीमत पर नीलाम कर दिया।

मुख्यालय भेजने का सख्त निर्देश 

अदालत ने राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) को स्पष्ट आदेश दिया है कि वह दोषी डीएफओ को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान दायित्व (भोजपुर डीएफओ) से मुक्त कर विभागीय मुख्यालय स्थानांतरित करें। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसे अधिकारी को किसी जिम्मेदार पद पर बनाए रखना उचित नहीं है, ताकि राज्य के नागरिकों को भविष्य में उनके मनमाने फैसलों से कोई और नुकसान न हो।

याचिकाकर्ताओं ने लगाया कम मूल्य पर नीलामी का आरोप 

यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 18 परिवहनकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि डीएफओ ने कानून को ताक पर रखकर उनके कीमती वाहनों को कौड़ियों के भाव नीलाम कर दिया। कोर्ट ने अधिकारी के इस कदम को प्रथमदृष्टया अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना है, क्योंकि मामला कोर्ट के अधीन होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अंतिम फैसला ले लिया गया था।

सरकार ने खंडपीठ में दी चुनौती, 27 जनवरी को अगली सुनवाई 

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अनंत प्रसाद सिंह ने कोर्ट को सूचित किया कि एकल पीठ द्वारा दिए गए स्थानांतरण के इस आदेश के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ (एलपीए) के समक्ष अपील दायर की है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल अपनी नाराजगी बरकरार रखी है। इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को मुकर्रर की गई है।

प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप 

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद बिहार के प्रशासनिक और वन विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है। यह आदेश उन अधिकारियों के लिए एक बड़ी नजीर माना जा रहा है जो न्यायिक प्रक्रिया के लंबित रहने के दौरान एकतरफा प्रशासनिक फैसले लेते हैं। अब सबकी नजरें 27 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार की अपील और डीएफओ के भविष्य पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।