दानापुर SDM की बढ़ी मुश्किलें: अधिवक्ता को बंधक बनाने के मामले में पटना हाईकोर्ट सख्त, CCTV सुरक्षित रखने का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के SDM द्वारा एक अधिवक्ता को कथित तौर पर बंधक बनाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने इस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

Patna - पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) द्वारा एक अधिवक्ता को कथित तौर पर बंधक बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है । जस्टिस अरुण कुमार झा ने अधिवक्ता प्रवीण कुमार द्वारा लगाए गए आरोपों पर सुनवाई करते हुए दानापुर SDM कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज को तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है । अधिवक्ता का आरोप है कि उन्हें एक वाद की पैरवी के दौरान अवैध रूप से 3 घंटे तक हिरासत में रखा गया, जिसके बाद कोर्ट ने अब संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर राज्य सरकार से इस प्रशासनिक मनमानी पर विस्तृत जवाब मांगा है  

अधिवक्ता को 3 घंटे तक कमरे में बंद रखने का आरोप

यह मामला अधिवक्ता प्रवीण कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने दानापुर SDM पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को जब प्रवीण कुमार एक मामले में पैरवी के लिए SDM कोर्ट में उपस्थित हुए, तो अधिकारी ने न केवल उन्हें बहस करने से रोका, बल्कि पुलिसकर्मियों की मदद से उन्हें करीब 3 घंटे तक एक कमरे में बंधक बना कर रखा। 

हाईकोर्ट का आदेश: साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो

जस्टिस अरुण कुमार झा ने 09 फरवरी 2026 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि SDM दानापुर कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज और घटना से संबंधित अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी का गंभीर उदाहरण माना है। 

SDM और दोषी कर्मियों को नोटिस जारी

अदालत ने इस मामले में दानापुर SDM और अन्य संबंधित कर्मियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी इस पूरे प्रकरण पर अगली सुनवाई में विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। यह मामला सीधे तौर पर एक अधिवक्ता की स्वतंत्रता और पेशेवर अधिकारों के हनन से जुड़ा है। 

अगली सुनवाई 16 अप्रैल को

अधिवक्ताओं के बीच इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है और इसे न्यायिक प्रक्रिया में प्रशासनिक हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है। पटना हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को करेगा, जिसमें सरकार और SDM की ओर से दिए गए जवाबों की समीक्षा की जाएगी।