तिरहुत शिक्षक निर्वाचन मतदाता सूची पर पटना हाई कोर्ट का फैसला: प्रमंडल आयुक्त को दिया बड़ा आदेश

पटना हाई कोर्ट ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन की मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों पर बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रमंडलीय आयुक्त को दो महीने के भीतर नई मतदाता सूची प्रकाशित करने का आदेश दिया है।

Patna -  पटना हाई कोर्ट ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर मुजफ्फरपुर भाजपा जिलाध्यक्ष एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर अहम सुनवाई की। जस्टिस ए अभिषेक रेड्डी की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदकों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्वाचकों की सूची पारदर्शी और त्रुटिहीन होनी चाहिए।

मतदाताओं की संख्या में 'अचानक' उछाल पर सवाल

आवेदकों की ओर से अधिवक्ता एसबीके मंगलम और अवनीश कुमार ने कोर्ट के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य रखे। उन्होंने बताया कि तिरहुत प्रमंडल के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा जारी 'प्रारूप मतदाता सूची' में निर्वाचकों की कुल संख्या मात्र 6300 थी। लेकिन जब 'अंतिम मतदाता सूची' प्रकाशित हुई, तो यह संख्या बढ़कर लगभग 9300 हो गई। बिना किसी ठोस आधार के 3000 नए मतदाताओं के जुड़ने पर कोर्ट ने सवाल उठाए हैं।

दो महीने के भीतर नई सूची का प्रकाशन

हाई कोर्ट ने तिरहुत प्रमंडल के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त को कड़ा निर्देश दिया है कि वे आपत्तियों पर सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान करें। कोर्ट ने आदेश दिया है कि आपत्तियों के निष्पादन के बाद अगले दो माह के भीतर नए सिरे से अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सुनिश्चित किया जाए। यह फैसला चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

पक्ष रखने का नहीं मिला था मौका

याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप था कि उन्होंने प्रारूप सूची जारी होने के बाद अयोग्य मतदाताओं का नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई थी। लेकिन प्रमंडलीय आयुक्त ने उनकी शिकायतों पर विचार करने या सुनवाई का अवसर देने के बजाय सीधे अंतिम सूची प्रकाशित कर दी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि सूची में कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जो मतदाता बनने की पात्रता नहीं रखते, जिससे चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकते थे।

चुनावी सरगर्मी के बीच न्यायिक हस्तक्षेप

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन को लेकर बिहार की राजनीति में पहले से ही सरगर्मी तेज है। ऐसे में हाई कोर्ट का यह आदेश उन राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत है जो मतदाता सूची में फर्जीवाड़े की शिकायत कर रहे थे। अब प्रशासन को निर्धारित समय सीमा के अंदर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से दोबारा दोहराना होगा, जिससे अयोग्य मतदाताओं को बाहर किया जा सके।