बाढ़ रोकने के नाम पर करोड़ों की लूट! मनेर में वायरल वीडियो के बाद जांच की खुली पोल,ग्रामीणों में भारी आक्रोश

बिहार के मनेर (हल्दीछपड़ा) में गंगा नदी के किनारे करोड़ों की लागत से हो रहा कटावरोधी कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। ठेकेदार और इंजीनियरों की मिलीभगत से बालू की जगह मिट्टी भरने का वीडियो वायरल। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

मनेर के हल्दीछपड़ा में कटावरोधी कार्य चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट,- फोटो : Reporter

मनेर। बाढ़ और नदी के भीषण कटाव से गांव को बचाने के लिए मनेर के हल्दीछपड़ा में गंगा नदी के किनारे चल रहा कटावरोधी कार्य पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। जल संसाधन विभाग, सोन सुरक्षा बाढ़ प्रमंडल खगौल की ओर से करोड़ों की लागत से कराए जा रहे इस काम में अभियंताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अनियमिताएं बरती जा रही हैं। स्थिति यह है कि कटाव रोकने के नाम पर सरकारी राशि की खुलेआम लूट मची है, जिससे आने वाले समय में ग्रामीणों पर बाढ़ का खतरा और गहरा गया है।

प्राक्कलन की धज्जियां: बालू की जगह भरी जा रही मिट्टी, वजन में भी भारी हेरफेर

हल्दीछपड़ा में दो अलग-अलग एजेंसियों द्वारा सौ-सौ मीटर की दूरी में कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है। सरकारी प्राक्कलन (एस्टीमेट) के अनुसार, एक जियो बैग में 125 किलो और ईसी बैग में 50 किलो सैंड (बालू) भरना अनिवार्य है। इसके अलावा, एक एनसी बैग में 50 किलो के 25 ईसी बैग भरकर नदी किनारे 4.5 मीटर ऊंचाई और 1.5 मीटर चौड़ाई में एनसी कार्य किया जाना है, जिसके बाद 2 मीटर चौड़ाई व 1 मीटर ऊंचाई में गैबियन कार्य (125 किलो के 12 जियो बैग) होना है।

लेकिन धरातल पर नियमों को ताक पर रख दिया गया है। सहायक अभियंता संजय कुमार सुमन और ठेकेदारों की मिलीभगत से बालू की जगह बैगों में मिट्टी भरी जा रही है। यही नहीं, 125 किलो के जियो बैग में महज 90 से 100 किलो और 50 किलो के ईसी बैग में सिर्फ 30 से 35 किलो मिट्टी ही भरी जा रही है। लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का भी कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है।

अंधेरे का फायदा: ग्रामीणों की नजरों से बचकर हो रही सरकारी राशि की लूट

ग्रामीणों के डर से ठेकेदार और अधिकारी इस घोटाले को अंजाम देने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब सुबह या देर शाम ग्रामीणों की चहलकदमी बंद हो जाती है, तब अंधेरे का फायदा उठाकर आनन-फानन में यह घटिया काम किया जाता है। ठेकेदार ने स्थानीय स्तर पर कुछ युवकों को अपने साथ मिला रखा है, जिनकी धौंस पर वह अपनी मनमानी चला रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जिस तरह से मानक के विपरीत जाकर मिट्टी से बोरियां भरी जा रही हैं, वह बाढ़ सुरक्षा नहीं बल्कि सीधे तौर पर सरकारी खजाने की डकैती है।

जांच के नाम पर खानापूर्ति: मुख्य अभियंता पर ठेकेदार को बचाने का आरोप

भ्रष्टाचार की हद पार होने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने घटिया निर्माण और बोरियों में मिट्टी भरे जाने का वीडियो बनाकर न सिर्फ उच्च अधिकारियों को भेजा, बल्कि इसे सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद विभाग के मुख्य अभियंता एजाज कलीम मामले की जांच करने हल्दीछपड़ा पहुंचे।हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य अभियंता की यह जांच महज एक दिखावा थी। उन्होंने न तो अपने आने की सूचना स्थानीय लोगों को दी और न ही मौके पर मौजूद ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मुख्य अभियंता इस बड़े भ्रष्टाचार की अनदेखी कर ठेकेदार और अपने चहेते सहायक अभियंता को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।


5 साल से जमे हैं सहायक अभियंता, अब मंत्री-सचिव से गुहार लगाएंगे ग्रामीण

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सहायक अभियंता संजय कुमार सुमन की कार्यशैली पर उठ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, सहायक अभियंता पिछले 5 वर्षों से इसी प्रमंडल में कुंडली मारकर बैठे हैं। लंबे कार्यकाल के कारण ठेकेदारों से उनके गठजोड़ इतने मजबूत हो चुके हैं कि वे बेखौफ होकर सरकारी पैसों का बंदरबांट कर रहे हैं। ग्रामीण लगातार इस घटिया काम का विरोध कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन से लेकर विभाग तक कोई सुनने को तैयार नहीं है। प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब ग्रामीणों ने इस महाघोटाले की लिखित शिकायत सीधे विभागीय सचिव और संबंधित मंत्री से मिलकर करने का निर्णय लिया है।