Patna Pakadua Vivah:फिर सामने आया 'पकड़ौआ विवाह', युवक को बंधक बना रचाई जबरन शादी

पटना के मनेर थाना क्षेत्र में 'पकड़ौआ विवाह' का सनसनीखेज मामला सामने आया है।छोटे भाई की साली की शादी में गए अरुण साव की लड़की पक्ष ने जबरन शादी करा दी। विरोध करने पर मारपीट भी की गई। थाने पहुंचे इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

पटना :फिर सामने आया 'पकड़ौआ विवाह', युवक को बंधक बना रचाई जबरन शादी- फोटो : news 4 nation

पटना में जबरन शादी यानी 'पकड़ौआ विवाह' का एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। मनेर थाना क्षेत्र के सुवर्णा गांव के रहने वाले शिवजी साव का पुत्र राकेश उर्फ अरुण साव अपने भाई कार्तिक की साली की शादी में शामिल होने अकिलपुर थाना क्षेत्र के रामदासचक पतलापुर गांव गया था। लेकिन वहां पहुंचते ही लड़की पक्ष के लोगों ने उसे बंधक बना लिया और मंडप में बैठाकर जबरन उसकी शादी अपनी लड़की से करा दी, जिसके बाद पूरे इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बन गई है।


इनकार करने पर मारपीट और दर्जनों लोगों के सामने सिंदूरदान

आरोप है कि जब युवक अरुण साव ने इस जबरन शादी का विरोध किया और शादी के मंडप पर बैठने से साफ इनकार कर दिया, तो लड़की पक्ष के लोग उग्र हो गए। उन्होंने युवक के साथ मारपीट की और डरा-धमकाकर उसे मंडप पर बैठे रहने के लिए मजबूर किया। इसके बाद दर्जनों लोगों की मौजूदगी में सामाजिक मर्यादा और नियमों को ताक पर रखकर युवक से जबरन लड़की की मांग में सिंदूरदान करवा दिया गया और शादी की रस्में पूरी कर ली गईं।


ससुराल में दुल्हन की 'नो एंट्री' और थाने पहुंचा हाई-वोल्टेज ड्रामा

जबरन शादी संपन्न कराने के बाद लड़की पक्ष ने दुल्हन को विदा कर अरुण के घर शेरपुर सुवर्णा गांव भेज दिया। हालांकि, इस जबरिया शादी से नाराज लड़के के परिजनों ने सामाजिक और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए दुल्हन को अपने घर में प्रवेश देने से साफ मना कर दिया। दुल्हन को घर में न रखने से नाराज लड़की पक्ष सीधे मनेर थाने शिकायत करने पहुंच गया, जिसके तुरंत बाद लड़के पक्ष ने भी लड़की के परिजनों के खिलाफ जबरन शादी और मारपीट की लिखित शिकायत दर्ज करा दी।


दोनों पक्षों के बीच थाने में समझौता, चर्चा में रहा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए मनेर पुलिस ने जब त्वरित छानबीन शुरू की, तो 'पकड़ौआ विवाह' की पूरी सच्चाई सामने आ गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों को थाने में तलब किया। चूंकि दोनों परिवार पहले से ही आपस में रिश्तेदार थे, इसलिए पुलिस की मौजूदगी और सामाजिक हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों ने सूझबूझ दिखाते हुए कानूनी पचड़े से बचने के लिए थाने में ही आपस में मामला सलटा (समझौता कर) लिया।