Patna Muzaffarpur Rapid Rail: पटना से मुजफ्फरपुर अब सिर्फ 1 घंटे में तय होगा सफर, 160 किमी की रफ्तार से बदलेगी बिहार की रफ्तार

Patna Muzaffarpur Rapid Rail: पटना से मुजफ्फरपुर के बीच सफर को तेज, आरामदेह और सुविधाजनक बनाने की कवायद ने अब रफ्तार पकड़ ली है।

Patna Muzaffarpur Rapid Rail: पटना से मुजफ्फरपुर के बीच सफर को तेज, आरामदेह और सुविधाजनक बनाने की कवायद ने अब रफ्तार पकड़ ली है। दोनों शहरों के बीच हाजीपुर के रास्ते रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम विकसित करने के लिए अध्ययन शुरू हो गया है। इस कॉरिडोर के अस्तित्व में आने के बाद पटना और मुजफ्फरपुर के बीच करीब दो घंटे का मौजूदा सफर घटकर लगभग एक घंटे रह जाने की उम्मीद है। इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है।

इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट  तैयार करेगा। इन दोनों रिपोर्टों पर करीब 31.59 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अध्ययन के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच रोजाना कितने लोग आवाजाही करते हैं और किन इलाकों से सबसे ज्यादा यात्री मिल सकते हैं।

160 की रफ्तार से दौड़ेगी रैपिड रेल

प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर पर ट्रेन करीब 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की योजना है। यह व्यवस्था दिल्ली-एनसीआर में संचालित क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की तर्ज पर विकसित की जाएगी। हालांकि, यह सामान्य मेट्रो से अलग होगी। इसका फोकस शहर के भीतर छोटी दूरी के बजाय आसपास के शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना होगा।

अध्ययन के दौरान संभावित रूट और स्टेशनों का भी निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए जमीन की उपलब्धता, निर्माण लागत, तकनीकी विकल्प और मौजूदा यातायात दबाव जैसे पहलुओं का गहन आकलन होगा। जरूरत के मुताबिक कॉरिडोर को एलिवेटेड या अंडरग्राउंड बनाने की संभावना भी देखी जाएगी।

मेट्रो, रेलवे और बस से जुड़ेगा RRTS

प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह होगी कि रैपिड रेल के स्टेशनों को पटना मेट्रो, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनल और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने की संभावना भी तलाशी जाएगी। मकसद ऐसा इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करना है, जिसमें यात्री एक माध्यम से दूसरे माध्यम पर आसानी से शिफ्ट हो सकें।

मई 2024 में राज्य सरकार ने RRTS को मंजूरी दी थी। इसके तहत पटना को मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने के साथ छोटे शहरों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना है। इसी कड़ी में पटना-हाजीपुर-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर की व्यवहार्यता और संभावित यात्री संख्या का अध्ययन किया जा रहा है।

तीन बड़े औद्योगिक हब होंगे आमने-सामने

इस कॉरिडोर का फायदा सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से इन तीनों क्षेत्रों के प्रमुख औद्योगिक इलाकों को भी रफ्तार मिल सकती है। कारोबार, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों के लिए लोगों की आवाजाही आसान होगी।अभी पटना से मुजफ्फरपुर पहुंचने में सड़क मार्ग से करीब दो घंटे लगते हैं। RRTS प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने के बाद यही दूरी करीब आधे समय में तय करने का लक्ष्य है। यानी यह कॉरिडोर सिर्फ सफर छोटा नहीं करेगा, बल्कि पटना और उत्तर बिहार के बीच कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट साबित हो सकता है।