नीट छात्रा मौत मामला: पटना पॉक्सो कोर्ट ने CBI को फटकारा, 90 दिन बाद भी चार्जशीट नहीं, आरोपी को मिल सकती है बेल

पटना नीट छात्रा मौत केस में पॉक्सो कोर्ट ने CBI की जांच को 'लापरवाही' बताया। 15 अप्रैल तक चार्जशीट नहीं आने पर मुख्य आरोपी मनीष रंजन को मिल सकती है जमानत। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Patna - : राजधानी पटना के चर्चित नीट छात्रा मौत मामले में पॉक्सो कोर्ट ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, सीबीआई (CBI) के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जांच के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक चार जांच अधिकारी (IO) बदले जा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी जिम्मेदारी और गंभीरता से काम नहीं किया। कोर्ट की इस टिप्पणी ने सीबीआई की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव और जांच में निरंतरता की कमी से अब आरोपी के बचने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

चार-चार जांच अधिकारी, फिर भी परिणाम शून्य

अदालत ने इस बात पर गहरा क्षोभ प्रकट किया कि इस हाई-प्रोफाइल केस में पहले बिहार पुलिस के दो और फिर सीबीआई के दो अधिकारियों ने कमान संभाली, लेकिन नतीजा सिफर रहा। कोर्ट ने कहा कि हर नया आईओ जांच को नए सिरे से शुरू करता है, जिससे पिछले अधिकारियों द्वारा जुटाए गए तथ्यों और वर्तमान जांच के बीच कोई तालमेल नहीं रह गया है। अदालत ने इसे 'जानबूझकर की गई लापरवाही' करार दिया है और सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट बताया है।

90 दिन पूरे: तकनीकी आधार पर रिहा हो सकता है मुख्य आरोपी

इस मामले का सबसे गंभीर कानूनी पहलू चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल न होना है। मुख्य आरोपी मनीष कुमार रंजन 15 जनवरी से जेल में बंद है। पॉक्सो एक्ट के तहत 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य है, जिसकी मियाद 15 अप्रैल को खत्म हो रही है। यदि कल तक सीबीआई ने चार्जशीट पेश नहीं की, तो आरोपी मनीष को तकनीकी आधार पर डिफॉल्ट बेल (Default Bail) मिल सकती है। अदालत ने अब जांच अधिकारी के बजाय सीबीआई के एसपी को खुद शपथपत्र (Affidavit) दायर करने का आदेश दिया है।

मौत की गुत्थी सुलझाने में एजेंसियां नाकाम

महीनों की जांच और सीबीआई जैसी बड़ी एजेंसी के शामिल होने के बाद भी यह पता नहीं चल पाया है कि नीट छात्रा की मौत कैसे हुई। मेडिकल ओपिनियन, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में एजेंसियां पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। मृतका के कमरे से मिली दवाइयों की स्ट्रिप्स और अन्य सामानों के बीच साक्ष्यों की 'चेन ऑफ कस्टडी' भी स्थापित नहीं की जा सकी है, जिससे मामला कानूनी रूप से बेहद कमजोर हो गया है।

आरोपी को बचाने की कोशिश? परिजनों के वकील का आरोप

मृतका के परिजनों के वकील ने जांच एजेंसियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों के साथ जिस तरह का खिलवाड़ हुआ है और जांच में जो देरी की गई है, वह स्पष्ट रूप से आरोपी को बचाने की साजिश की ओर इशारा करती है। गवाहों के बयानों में विसंगतियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को नजरअंदाज करने की वजह से न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है। अब सबकी नजरें कल होने वाली सुनवाई और सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।