Patna NEET student death: पटना NEET छात्रा मौत मामला में नया मोड़! पोस्टमार्टम और FSL रिपोर्ट से यौन हिंसा की पुष्टि, पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल

Patna NEET student death: पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत मामले में पोस्टमार्टम और FSL रिपोर्ट ने यौन हिंसा की आशंका को मजबूत किया, पुलिस की प्रारंभिक जांच पर गंभीर सवाल उठे हैं।

पटना छात्रा की मौत का मामला- फोटो : social media

Patna NEET student death: पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत का मामला अब गंभीर आपराधिक जांच में बदल चुका है। शुरुआती दौर में पटना पुलिस द्वारा यौन हिंसा से इनकार किए जाने के बाद अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जांच ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है। इन दो स्वतंत्र रिपोर्टों ने यौन हिंसा की आशंका को मजबूत किया है, जिससे पुलिस की शुरुआती कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटी पुलिस की शुरुआती थ्योरी

इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। यह निष्कर्ष पुलिस के उन शुरुआती बयानों के ठीक उलट था, जिनमें बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के ही यौन शोषण से इनकार कर दिया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद पुलिस को अपनी जांच की दिशा बदलनी पड़ी और मामले को दोबारा गंभीर आपराधिक एंगल से देखा जाने लगा।

FSL रिपोर्ट से यौन हिंसा की आशंका और मजबूत

मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक जांच कराई गई। 25 जनवरी को FSL की बॉयोलॉजिकल रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी गई, जिसने पूरे केस को और संवेदनशील बना दिया। रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय पहने गए छात्रा के एक अंतर्वस्त्र से मानव स्पर्म के अवशेष पाए गए हैं। यह फॉरेंसिक साक्ष्य यौन हिंसा की आशंका को सीधे तौर पर समर्थन देता है। अब स्पर्म का डीएनए प्रोफाइल तैयार किया जा रहा है, जिसका मिलान गिरफ्तार आरोपी और एसआईटी द्वारा चिन्हित अन्य संदिग्धों से किया जाएगा।

पुलिस की लापरवाही पर कार्रवाई, दो थानाध्यक्ष निलंबित

फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद पटना पुलिस मुख्यालय ने मामले की आंतरिक समीक्षा की। जांच में यह सामने आया कि शुरुआती स्तर पर तथ्यों को गंभीरता से नहीं लिया गया और जल्दबाजी में बयान दिए गए। इसके बाद चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी और कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि प्रारंभिक जांच में गंभीर चूक हुई थी।

CID की एंट्री, हॉस्टल में गहन जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब CID भी जांच में शामिल हो गई है। रविवार को CID की टीम छात्रा के गर्ल्स हॉस्टल पहुंची, जहां लगभग दो घंटे तक कमरे, आसपास के क्षेत्र और रिकॉर्ड्स की जांच की गई। इस दौरान एसआईटी के अधिकारी भी मौजूद रहे। जांच पूरी होने के बाद CID टीम वापस लौट गई, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि केस की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है।

हॉस्टल खोला गया, छात्राओं को सामान ले जाने की अनुमति

CID जांच के बाद प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की निगरानी में हॉस्टल का ताला खुलवाया। इसके बाद वहां रहने वाली छात्राओं को बारी-बारी से अपना निजी सामान निकालने की अनुमति दी गई। सभी छात्राएं औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद हॉस्टल परिसर से चली गईं।

पुलिस की जल्दबाजी पर उठते सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस ने पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने से पहले बार-बार यौन शोषण से इनकार क्यों किया। शुरुआती बयानों में नींद की गोलियों और डॉक्टरों के हवाले से दिए गए दावों को बाद की रिपोर्टों ने कमजोर साबित कर दिया। अब जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या किसी स्तर पर मामले को दबाने या दिशा भटकाने की कोशिश की गई थी।

Patna Student Death Case Timeline: घटनाक्रम की पूरी समयरेखा

5 जनवरी को छात्रा गांव से लौटकर चित्रगुप्त नगर स्थित हॉस्टल पहुंची।

6 जनवरी को वह बेहोशी की हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराई गई।

9 जनवरी को पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।

11 जनवरी को इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई।

11 जनवरी को ही पुलिस ने यौन शोषण से इनकार किया।

12 जनवरी को पीएमसीएच में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया।

13 जनवरी को पुलिस ने फिर यौन हिंसा से इनकार किया।

15 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका जताई गई।

15 जनवरी को हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार किया गया।

16 जनवरी को गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने मामले का संज्ञान लिया और डीजीपी के आदेश पर SIT गठित हुई।

17 जनवरी को ADG, IG और SSP सहित SIT ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

25 जनवरी को FSL रिपोर्ट में मानव स्पर्म की पुष्टि हुई।

25 जनवरी को दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया।

26 जनवरी को CID टीम ने हॉस्टल में जांच की।