पटना पुलिस गलियारे की वो 'महिला अधिकारी', जिनकी रसूख के आगे नतमस्तक है पूरा विभाग! जानें इनसाइड स्टोरी

पटना पुलिस महकमे में इस 'महिला अधिकारी' की हनक के आगे सब नतमस्तक, सड़कों पर चिलचिलाती धूप हो या रात का घुप्प अंधेरा, मनपसंद पोस्टिंग चाहिए तो पैरवी का केंद्र यही बनी हैं। रसूख के इस खेल से अब ईमानदार अधिकारियों के मनोबल और विभागीय शुचिता पर सव

पटना पुलिस गलियारे की वो 'महिला अधिकारी', जिनकी रसूख के आगे नतमस्तक है पूरा विभाग- फोटो : news 4 nation AI

पटना पुलिस महकमे के गलियारों में इन दिनों एक महिला अधिकारी का रसूख और हनक टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई है। प्रशासनिक हलकों में यह बात तेजी से फैल रही है कि इस महिला अधिकारी के प्रभाव के आगे पूरा विभाग नतमस्तक नजर आ रहा है। विभाग के भीतर उनकी मजबूत पकड़ और 'हर मौसम में पुष्प खिलाने' (काम कराने) की अद्भुत क्षमता को लेकर सहकर्मियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच कौतूहल और विस्मय का माहौल है, जिससे हर कोई हैरान है।


मनपसंद पोस्टिंग का केंद्र बिंदु बनीं महिला अधिकारी

विभाग के भीतर और बाहर दबी जुबान में यह चर्चा आम है कि सड़कों पर चिलचिलाती धूप हो या रात का घुप्प अंधेरा, अपनी ड्यूटी बदलने या मनपसंद जगह पर पोस्टिंग कराने के लिए लोग इन्हीं से संपर्क साध रहे हैं। दावों के मुताबिक, ट्रांसफर-पोस्टिंग की फाइलों में उनकी पैरवी और दखलअंदाजी इतनी प्रभावी हो चुकी है कि उनके सुझावों को दरकिनार करना किसी के लिए भी आसान नहीं रह गया है। यही वजह है कि वे तबादला चाहने वाले कर्मियों के लिए मुख्य सहारा बन चुकी हैं।


रसूख के खेल से ईमानदार पुलिसकर्मियों का मनोबल टूटा

एक ही अधिकारी के पास इतनी बड़ी प्रशासनिक ताकत केंद्रित होने को लेकर अब महकमे के भीतर ही गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिसिंग के जानकार इसे तय नियमों और स्थापित सरकारी प्रक्रियाओं से परे जाकर व्यक्तिगत प्रभाव का खेल मान रहे हैं। विभाग के एक बड़े धड़े का साफ कहना है कि इस प्रकार की 'पैरवी संस्कृति' और हनक के कारण दिन-रात ईमानदारी से कर्तव्य निभाने वाले अधिकारियों का मनोबल टूटता है।


पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की उठने लगी मांग

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब पुलिस मुख्यालय, महानिदेशालय और उच्च अधिकारियों से इस पर तुरंत संज्ञान लेने की उम्मीद की जा रही है। महकमे के भीतर ही विभागीय शुचिता और तबादलों में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि इस तरह के रसूख और मनमानी की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो इससे पटना पुलिस की जनता के बीच छवि पर विपरीत असर पड़ सकता है।