Patna Ram Navami Mahotsav: श्रीराम जन्म महोत्सव को लेकर तैयारी शुरु, पटना का डॉकबंगला चौराहा बनेगा श्रीराम चौक, 52 यात्राओं के विराट स्वरूप का दर्शन करेंगे 5 लाख श्रद्धालु

Patna Ram Navami Mahotsav: राजधानी पटना में आगामी रामनवमी के पावन अवसर पर अद्वितीय आध्यात्मिक-धार्मिक महोत्सव का भव्य आयोजन सुनिश्चित किया जा रहा है।

पटना का डॉकबंगला चौराहा बनेगा श्रीराम चौक- फोटो : reporter

Patna Ram Navami Mahotsav: राजधानी पटना में आगामी रामनवमी के पावन अवसर पर अद्वितीय आध्यात्मिक-धार्मिक महोत्सव का भव्य आयोजन सुनिश्चित किया जा रहा है।पटना के हृदयस्थल डाकबंगला चौराहा को इस अवसर पर श्रीराम चौक के दिव्य स्वरूप में रूपांतरित किया जा रहा है, जहाँ मुख्य समारोह का आयोजन होगा। इस अलौकिक आयोजन में पाँच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के समागम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस एवं उत्साह से अनुप्राणित होगा।

इस वर्ष विशेष आकर्षण के रूप में नगर के 52 विभिन्न स्थलों से भव्य शोभायात्राओं का निर्गमन होगा, जिनका अभिनंदन एवं स्वागत डाकबंगला स्थित मुख्य मंच पर किया जाएगा। मार्गों पर तोरण-द्वारों का निर्माण, भव्य प्रकाश-सज्जा तथा रामायण के प्रेरणादायी प्रसंगों का सजीव चित्रण इस आयोजन को अद्वितीय आध्यात्मिक आयाम प्रदान करेगा।

समिति के संयोजक नितिन नवीन ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित महोत्सव बनाने का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार गणपति उत्सव और दुर्गा पूजा अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं, उसी प्रकार पटना का रामनवमी महोत्सव भी देशव्यापी ख्याति अर्जित करेगा। उन्होंने महिलाओं, युवाओं एवं बालकों से उत्साहपूर्वक सहभागिता का आह्वान किया।

समिति अध्यक्ष सरदार जगजीवन सिंह बबलू के अनुसार, सम्पूर्ण नगर को दो लाख रामध्वजों, आकर्षक तोरण-द्वारों एवं आलोकमय सज्जा से अलंकृत किया जाएगा। इस भव्य समारोह में राज्यपाल , सीएम नीतीश कुमार सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

महोत्सव में देश के विविध प्रांतों से आगत कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जनमानस को मंत्रमुग्ध करेंगे। मुंबई की झांझ पथक, काशी की गंगा आरती, झारखंड की नृत्य मंडली, चंदननगर की आलोक सज्जा तथा पंजाब के निहंगों द्वारा युद्धकला एवं भांगड़ा प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण होंगे।

बता दें  वर्ष 2010 में प्रारंभ हुआ यह महोत्सव प्रारंभ में मात्र 8 शोभायात्राओं तक सीमित था, किंतु अब यह 52 यात्राओं के विराट स्वरूप में विकसित हो चुका है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, अपितु सांस्कृतिक समन्वय एवं सामाजिक एकता का भी भव्य उदाहरण बनकर उभर रहा है।