Patna Rural SP Action:कांड निष्पादन में सुस्ती पर 72 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज,त्योहार से ठीक पहले वेतन स्थगित

Patna Rural Police News: पटना ग्रामीण SP कोमल मीणा ने सितंबर 2026 की समीक्षा बैठक में लापरवाही और कांड निष्पादन में देरी पर 72 पुलिसकर्मियों का वेतन रोका। बाढ़, फतुहाँ, बख्तियारपुर समेत 11 थानों पर कार्रवाई।

पटना में 72 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज,त्योहार से ठीक पहले वेतन स्थगित- फोटो : news 4 nation AI

पटना जिला ग्रामीण पुलिस द्वारा जारी एक सख्त जिलादेश ने महकमे में हलचल मचा दी है। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी) कोमल मीणा ने सितंबर 2026 की मासिक अपराध गोष्ठी के दौरान कार्य में लापरवाही बरतने और मुकदमों (कांडों) का समय पर निष्पादन न करने के मामले को गंभीरता से लिया। प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से इस बैठक में कम प्रगति दिखाने वाले कुल 72 पुलिस अधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक के लिए तत्काल प्रभाव से अवरुद्ध (धारित) कर दिया गया है।


बाढ़ से लेकर फतुहाँ तक गाज: इन थानों के पुलिसकर्मी कार्रवाई की ज़द में

एसपी की इस गाज की ज़द में पटना ग्रामीण इलाके के कई प्रमुख थाने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बख्तियारपुर थाने के सर्वाधिक 13 और बाढ़ थाने के 11 पुलिसकर्मियों का वेतन रोका गया है। इसके अलावा अथमलगोला से 10, फतुहाँ से 8, खुशरूपुर से 7, पंडारक से 6, दीदारगंज व सालिमपुर से 5-5, मटौर (मराँची) से 3 और मोकामा व नदी थाने के 2-2 अधिकारियों पर यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।


महापर्व के मुहाने पर कार्रवाई: परिवारों में गहराया आर्थिक व मानसिक संकट

एक ओर जहाँ इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य लापरवाह कर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति सजग करना है, वहीं दूसरी ओर महापर्व के ठीक मुहाने पर वेतन रुक जाने से पुलिसकर्मियों के परिजनों में भारी निराशा है। दिन-रात कानून व्यवस्था और आम जन की सुरक्षा में तैनात रहने वाले इन पुलिसकर्मियों के घरों में त्योहारी उल्लास अचानक फीका पड़ गया है। अचानक आर्थिक संसाधन थम जाने से परिजनों के सामने दैनिक खर्चों और पर्व की तैयारियों को लेकर व्यावहारिक संकट खड़ा हो गया है।


प्रशासनिक कसावट बनाम मानवीय पहलू: टाइमिंग को लेकर उठ रहे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक अनुशासन और पुलिसिंग में सुधार के लिए कठोर कदम उठाना बेहद आवश्यक है, लेकिन इसकी टाइमिंग और तरीका थोड़ा संवेदनशील होना चाहिए था। विश्लेषकों के अनुसार, पर्व-त्योहारों के समय ऐसी कार्रवाई से पुलिसकर्मियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। यदि अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय पहलू का ध्यान रखा जाता, तो महकमे में कानून का खौफ भी कायम रहता और कर्मियों के परिवारों की त्योहारी खुशियाँ भी प्रभावित न होतीं।

रविशंकर की रिपोर्ट