CM नीतीश के जन्मदिन पर जदयू को सबसे बड़ा झटका, भाजपा की होली भी हुई बदरंग, सबसे बड़ी हार

1 मार्च को नीतीश कुमार के जन्मदिन से ठीक पहले, 1 जनवरी की मध्यरात्रि नीतीश कुमार के जन्मदिन पर जदयू को बड़ा सियासी झटका लगा है.

Nitish Kumars birthday- फोटो : news4nation

Nitish Kumar : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जन्मदिन से ठीक पहले उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बिहार की सत्ता में लंबे समय से काबिज जदयू न केवल पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कोई भी पद जीतने में नाकाम रही, बल्कि एनडीए में शामिल भाजपा को भी उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी। होली से पहले आए इन नतीजों ने नीतीश कुमार के जन्मदिन की खुशियों में खलल डाल दिया है।


बिहार की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस से जुड़े संगठन NSUI ने बड़ी जीत दर्ज की है। NSUI के शांतनु शेखर ने अध्यक्ष पद, जबकि खुशी कुमारी ने महासचिव पद पर जीत हासिल की है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार सिफत फैज उपाध्यक्ष चुनी गईं। संयुक्त सचिव पद पर ABVP के अभिषेक कुमार को जीत मिली।


अध्यक्ष पद के मुकाबले में शांतनु शेखर ने छात्र जदयू के उम्मीदवार प्रिंस कुमार को 1496 मतों के भारी अंतर से हराया। शांतनु को कुल 2896 वोट मिले, जबकि प्रिंस कुमार को 1400 वोटों पर संतोष करना पड़ा। मतगणना के पहले राउंड से ही शांतनु लगातार बढ़त बनाए हुए थे। वहीं उपाध्यक्ष पद पर सिफत फैज ने छात्र जदयू के आयुष हर्ष को 65 वोटों से पराजित किया। सिफत को 1571 और आयुष को 1503 वोट प्राप्त हुए।


इन नतीजों के साथ यह साफ हो गया कि जदयू का छात्र संगठन इस बार एक भी सीट जीतने में पूरी तरह विफल रहा। यह लगातार दूसरा मौका है जब पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में जदयू को करारी हार झेलनी पड़ी है। इससे पहले वर्ष 2025 के चुनाव में भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी की उम्मीदवार मैथिली मृणालिनी ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी। पटना विश्वविद्यालय के 107 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार था जब किसी छात्रा ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया था।


गौरतलब है कि वर्ष 2018 के छात्रसंघ चुनाव में जदयू के मोहित प्रकाश अध्यक्ष बने थे, हालांकि उस समय भी उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव जैसे अहम पद एबीवीपी के खाते में गए थे। केवल कोषाध्यक्ष पद पर ही जदयू को सफलता मिली थी। इसके बाद से लगातार छात्रसंघ चुनावों में जदयू का प्रदर्शन कमजोर होता गया है।


ऐसे में 1 मार्च को नीतीश कुमार के जन्मदिन से ठीक पहले, 1 जनवरी की मध्यरात्रि आए चुनाव परिणामों ने जदयू की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं बिहार की सियासत में अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली कांग्रेस ने करीब 40 साल बाद न सिर्फ पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष पद जीता, बल्कि महासचिव की कुर्सी पर भी NSUI का कब्जा जमाया है, जिसे विपक्षी राजनीति के लिए बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।