नवादा में जदयू जिला अध्यक्ष चुनाव: हंगामा, मारपीट और गाली-गलौज के बीच स्थगित

जदयू जिला अध्यक्ष चुनाव में हंगामे के बाद पुलिस को बुलाया गया। बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति नियंत्रित की।

JDU district president election in Nawada
JDU district president election in Nawada- फोटो : news4nation

JDU : नवादा जिले में जनता दल यूनाइटेड के जिला अध्यक्ष पद के लिए होने वाला संगठनात्मक चुनाव रविवार को जमकर विवाद हो गया। पार्टी कार्यालय जंग के मैदान में तब्दील हो गया, जहां मारपीट, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की का सिलसिला चला। चुनाव के निर्वाचन पदाधिकारी  हरि कृपाल ने स्थिति को देखते हुए पूरी प्रक्रिया स्थगित कर दी और वर्तमान जिला अध्यक्ष पद सहित पूरी जिला कमेटी को भंग घोषित कर दिया। अब नवादा में जदयू का कोई जिला अध्यक्ष नहीं रहा है। पार्टी हाईकमान से प्राप्त निर्देश के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले का इंतजार रहेगा।


15 उम्मीदवारों में सर्वसम्मति न बनने पर शुरू हुआ हंगामा

चुनाव में कुल 15 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें मनोज सिंह, सुरेश सिंह, संतोष कुमार सिन्हा, विनोद कुमार, मुकेश विद्यार्थी, अशोक सिंह, प्रियोरंजन, अयोध्या सारण, डॉ. राजीव रंजन, मोहन सिंह, सुमन सिंह, राजीव रंजन, सुदेश्वर चौधरी, नागेश्वर सिंह और विपिन कुमार दांगी शामिल थे। प्रक्रिया के तहत 17 प्रखंड अध्यक्षों द्वारा वोटिंग होनी थी। 


पर्यवेक्षक हरि कृपाल ने बताया कि नामांकन जांच पूरी होने के बाद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर सर्वसम्मति से एक नाम चुनने की कोशिश की गई। हस्ताक्षर लिए जा रहे थे, तभी विकास सिंह नामक युवक ने हंगामा शुरू कर दिया। वह पर्यवेक्षक को बाहर खींचने लगा और गाली-गलौज की। पर्यवेक्षक की पत्नी (जो खुद उम्मीदवार थीं) के सामने अपशब्द कहे गए। पर्यवेक्षक ने कहा, "यह गुंडागर्दी असहनीय है। मुख्यमंत्री कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।"


पुलिस ने संभाली स्थिति, सुरक्षा में चूक का आरोप


हंगामे के बाद पुलिस को बुलाया गया। नगर थाना प्रभारी उमाशंकर सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति नियंत्रित की। पर्यवेक्षक ने आरोप लगाया कि पहले से पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से चूक हुई। विधायक कार्यालय के पास चुनाव होने के बावजूद असुरक्षा महसूस हुई। 

उन्होंने कहा, "अगर चैंबर में गुंडागर्दी हो सकती है, तो बाहर क्या नहीं होगा।" पार्टी ने स्पष्ट किया कि ऐसे हिंसक व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्णय पर नई कमेटी गठित होगी। यह घटना जदयू के आंतरिक लोकतंत्र में गुटबाजी और अनुशासन की कमी को उजागर करती है।

अमन की रिपोर्ट