सरकारी दफ्तरों में अब अनुबंध पर नहीं चलेंगी निजी गाड़ियां, बिहार परिवहन विभाग का बड़ा फैसला

बिहार में अब कमर्शियल वाहनों को निजी में बदलना आसान होगा, क्योंकि इसका अधिकार अब DTO को दे दिया गया है; वहीं सरकारी विभागों को निजी गाड़ियां किराए पर न लेने की सख्त चेतावनी दी गई है।

Patna - बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने घोषणा की है कि राज्य में छोटी और हल्की व्यावसायिक गाड़ियों को निजी वाहन (Private Vehicle) में तब्दील करने की प्रक्रिया अब आसान कर दी गई है। पहले यह निर्णय लेने का अधिकार जिला पदाधिकारी (DM) के पास था, जिसे अब जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को हस्तांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव से वाहन मालिकों को जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और फाइलों का निष्पादन तेजी से हो सकेगा। 

रूपांतरण के लिए अनिवार्य शर्तें और मानक

वाहन रूपांतरण की अनुमति देने से पहले डीटीओ कुछ महत्वपूर्ण मानकों की जाँच करेंगे। व्यावसायिक गाड़ी को निजी में बदलने के लिए उसका कम से कम दो साल तक इस्तेमाल में रहना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, वाहन मालिक को रूपांतरण के आवेदन से पहले अपने सभी पुराने टैक्स का भुगतान करना होगा और वाहन के रखरखाव के लिए अपनी आर्थिक सक्षमता साबित करनी होगी। वाहन मालिक को फिटनेस सर्टिफिकेट लेना भी आवश्यक होगा और यदि कमर्शियल दरें निजी दरों से अधिक हैं, तो टैक्स के अंतर की राशि जमा करनी होगी। 

सरकारी विभागों में निजी वाहनों के उपयोग पर प्रतिबंध

परिवहन मंत्री ने सरकारी विभागों और निगमों द्वारा निजी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को किराए पर लेने की प्रथा पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसा करना कानून के खिलाफ है क्योंकि इससे राजस्व की हानि होती है और सड़क सुरक्षा प्रभावित होती है। अब सभी विभागों को अनुबंध पर गाड़ी लेते समय उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जाँचने, वैध परमिट सुनिश्चित करने और वाहन पर पीले रंग की हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) की मौजूदगी सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। 

नियम उल्लंघन पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग करते पकड़े जाने पर पहली बार में 5,000 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की सजा का प्रावधान है। वहीं, यदि कोई वाहन मालिक दूसरी बार इसी अपराध में पकड़ा जाता है, तो उसे 10,000 रुपये तक का जुर्माना या एक साल की जेल भुगतनी पड़ सकती है। विभाग ने भविष्य में किसी भी निजी वाहन को अनुबंध पर न लेने का सख्त फैसला किया है।