Rabri Devi House: घर खाली करने को लेकर राबड़ी देवी को मिली बड़ी राहत,10 सर्कुलर रोड पर बिहार में छिड़ा है सियासी संग्राम!
Rabri Devi House: बिहार की सियासत में एक बार फिर सरकारी आवास बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।...
Rabri Devi House: बिहार की सियासत में एक बार फिर सरकारी आवास बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। पटना के चर्चित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। बिहार सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। फिलहाल उनको 15 दिनों की मोहलत मिल गई है. सरकार के अल्टीमेटम के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल इस आवास को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पिछले करीब 20 वर्षों से 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रह रही हैं। वर्ष 2006 से यह बंगला उनके राजनीतिक और पारिवारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी आवास में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं। बिहार की राजनीति में 10 सर्कुलर रोड को राजद का सत्ता केंद्र माना जाता है।
हाल ही में बिहार सरकार ने इस आवास को पशुपालन मंत्री नंदकिशोर राम के नाम आवंटित कर दिया है। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने राबड़ी देवी को नोटिस थमाते हुए 15 दिनों के भीतर बंगला खाली करने का निर्देश दिया है। सचिवालय थाना के डीएसपी और मजिस्ट्रेट ने स्वयं आवास पहुंचकर नोटिस सौंपा।
इस पूरे मामले पर जनता दल यूनाइटेड ने राजद पर तीखा हमला बोला है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकारी आवास को लेकर इतना मोह क्यों है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद सरकारी मकान छोड़ देना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। यदि उनके पास पहले से आलीशान निजी संपत्ति और विशाल आवास मौजूद हैं, तो फिर एक सरकारी बंगले के लिए इतनी बेचैनी क्यों दिखाई जा रही है?
नीरज कुमार ने यह भी कहा कि अगर सरकार आज उनका आवास बदल दे तो वे तत्काल खाली कर देंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या 10 सर्कुलर रोड में कोई खजाना, दस्तावेज़ या ऐसी चीज मौजूद है, जिसके कारण उसे छोड़ने से परहेज किया जा रहा है?दूसरी ओर राजद इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर देख रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आवास का यह विवाद अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और ज्यादा गर्मी पैदा कर सकता है।