Rajysabha Election : 5 सीटें, 6 चेहरे और कांटे की टक्कर, 12 साल बाद आई चुनाव की नौबत, AIMIM और BSP के पास 'जीत की चाबी'

Rajysabha Election : 12 वर्षों के बाद बिहार में पांच सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होंगे। सुबह नौ से शाम चार बजे तक मतदान होगा। इसके बाद मतगणना होगी और परिणाम उसी दिन घोषित कर दिया जाएगा।

12 साल बाद राज्यसभा चुनाव - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार की सियासत में एक दशक से भी ज्यादा समय के बाद राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग की स्थिति बन गई है। राज्य की पांच राज्यसभा सीटों के लिए आगामी 16 मार्च को मतदान होगा। विधानसभा सचिवालय ने सभी 243 विधायकों के मतदान के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे, जिसके तुरंत बाद मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

2014 के बाद पहली बार चुनावी मुकाबला

बिहार में आखिरी बार 2014 में राज्यसभा के लिए मतदान हुआ था, जब जदयू के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतर आए थे। उस वक्त पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियाबी को कड़े मुकाबले के बाद जीत मिली थी। अब 12 वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनी है, क्योंकि पांच सीटों के लिए मैदान में छह उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं।

मैदान में दिग्गज, एनडीए और राजद के बीच शह-मात

इस चुनाव में जदयू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा की ओर से नितिन नवीन और शिवेश राम मैदान में हैं। दूसरी ओर, राजद ने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह पर फिर से भरोसा जताया है। गौरतलब है कि अप्रैल में रिटायर हो रहे पांच सांसदों में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी शामिल हैं, जिन्हें इस बार जदयू ने टिकट नहीं दिया है। उपेन्द्र कुशवाहा की सीट पर भी इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

संख्या बल का गणित: पांचवीं सीट पर टिकी निगाहें

विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर चार सीटों पर एनडीए की जीत तय मानी जा रही है। एनडीए के पास कुल 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे भाजपा और जदयू के दो-दो उम्मीदवारों की राह आसान है। चार सीटों की जीत सुनिश्चित करने के बाद एनडीए के पास 38 अतिरिक्त वोट बचेंगे, जबकि राजद के पास 35 वोट हैं। असली मुकाबला इसी पांचवीं सीट के लिए है, जहाँ जीत-हार का अंतर बहुत कम रहने की उम्मीद है।

क्रॉस वोटिंग और छोटे दलों की भूमिका

पांचवीं सीट पर जीत की चाबी अब एआईएमआईएम (5 विधायक) और बसपा (1 विधायक) के पास है। इन 6 विधायकों का रुख और संभावित 'क्रॉस वोटिंग' चुनाव के परिणाम को किसी भी ओर पलट सकती है। राजद और एनडीए दोनों की नजर इन निर्दलीय और छोटे दलों के वोटों पर टिकी है। क्या उपेंद्र कुशवाहा की विरासत वाली सीट पर एनडीए कब्जा बरकरार रख पाएगा या राजद कोई बड़ा उलटफेर करेगा, इसका फैसला 16 मार्च को ही होगा।