Bihar ration card: राशन पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक, बिहार में 33 लाख कार्डधारियों पर गिरेगी गाज, चेक कर लें कहीं लिस्ट में आपका नाम भी तो नहीं...

Bihar ration card: खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 33 लाख 25 हजार राशन कार्डधारियों के नाम काटने की तैयारी कर ली है।...

राशन पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक- फोटो : reporter

Bihar ration card: बिहार की सियासत में जन वितरण प्रणाली को लेकर बड़ा भूचाल आ गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 33 लाख 25 हजार राशन कार्डधारियों के नाम काटने की तैयारी कर ली है। इनमें से करीब 4.70 लाख नाम पहले ही सूची से बाहर हो चुके हैं, जबकि शेष पर जिलों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई केंद्र सरकार द्वारा चिह्नित 57 लाख एक हजार 731 संदिग्ध लाभुकों की सूची के आधार पर की जा रही है।

जिला स्तर पर 51 लाख मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और छह लाख की तफ्तीश अंतिम दौर में है। प्रशासनिक हलकों में इसे “सफाई अभियान” कहा जा रहा है, तो विपक्ष इसे गरीबों के हक पर हमला बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध सूची में शामिल लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उनके नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है और फिर चरणबद्ध तरीके से कार्ड रद्द किए जा रहे हैं।

दरअसल, केंद्र ने जिन लोगों को संदिग्ध माना है, उनमें चारपहिया वाहन मालिक, बड़ी कंपनियों के निदेशक और आयकर दाता शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि ऐसे लोग जन वितरण प्रणाली का अनाज लेने के मानक पर खरे नहीं उतरते।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने साफ लफ्जों में कहा है कि कई ऐसे लोग भी राशन कार्ड बनाकर बैठे हैं, जो असल में पात्र नहीं हैं। कोई बड़ी कंपनी का डायरेक्टर है, कोई चारपहिया गाड़ी का मालिक, तो कई महीनों तक अनाज का उठाव ही नहीं करते। ऐसे अपात्र कार्डधारियों पर कार्रवाई जारी है, ताकि असली जरूरतमंदों को उनका हक मिल सके।

सूची में वे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने कई महीनों से राशन का उठाव नहीं किया है। राज्य में इस वक्त करीब दो करोड़ नौ लाख परिवारों के पास राशन कार्ड हैं और लाभुकों की संख्या साढ़े आठ करोड़ के आसपास बताई जाती है।

सियासी गलियारों में यह फैसला ‘पारदर्शिता बनाम राजनीति’ की जंग का नया मोर्चा बन चुका है। सवाल उठ रहा है क्या यह कदम वाकई व्यवस्था को दुरुस्त करेगा या फिर आने वाले दिनों में सियासी तापमान और बढ़ाएगा? फिलहाल इतना तय है कि राशन की राजनीति अब निर्णायक दौर में दाखिल हो चुकी है।