Bihar CO Strike : बिहार में 55 दिनों बाद खत्म हुई राजस्व अधिकारियों की हड़ताल, 4 मई से काम पर लौटेंगे सीओ

Bihar CO Strike : बिहार सरकार के आश्वासनं के बाद सीओ और आरओ ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है. 4 मई से अब सीओ काम पर लौट जायेंगे. हड़ताल खत्म होने के बाद अब भूमि संबंधित कार्यों में तेजी आएगी.....पढ़िए आगे

सीओ की हड़ताल ख़त्म - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार में पिछले करीब दो महीनों से चल रहा प्रशासनिक गतिरोध समाप्त हो गया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर गए अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व पदाधिकारी (RO) अब काम पर वापस लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद 'बिहार संयुक्त राजस्व सेवा महासंघ' ने गुरुवार को हड़ताल खत्म करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। इस फैसले से राज्य की ठप पड़ी राजस्व व्यवस्था एक बार फिर पटरी पर लौटेगी।

हड़ताल खत्म होने का सबसे बड़ा लाभ आम जनता को मिलेगा, जो पिछले 55 दिनों से जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), सीमांकन और अन्य राजस्व दस्तावेजों के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर काट रही थी। हड़ताल के कारण हजारों आवेदन लंबित पड़े थे और रजिस्ट्री से जुड़े काम भी बुरी तरह प्रभावित हुए थे। अब 4 मई से अधिकारियों के योगदान देने के बाद अंचलों में रुके हुए काम सुचारु रूप से शुरू हो सकेंगे, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

यह आंदोलन सरकार और अधिकारियों के बीच भारी टकराव का गवाह रहा। हड़ताल के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया था और वेतन रोकने की चेतावनी भी दी थी। हालांकि, गतिरोध तब और बढ़ गया जब तत्कालीन प्रधान सचिव सीके अनिल के कड़े रुख के बावजूद अधिकारी झुकने को तैयार नहीं हुए। अंततः सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए सीके अनिल का तबादला कर दिया, जिसे सुलह की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

अधिकारियों की यह हड़ताल आगामी 'जनगणना 2027' के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई थी। बिहार में जनगणना का जिम्मा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पास ही है और 2 मई से प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकानों की गणना का कार्य शुरू होना है। ऐसे में जमीनी स्तर के सबसे मुख्य अधिकारियों (सीओ-आरओ) की अनुपस्थिति से जनगणना की प्रक्रिया बाधित होने का खतरा मंडरा रहा था, जिसे देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकालना ही बेहतर समझा।

महासंघ के अनुसार, सम्राट चौधरी की सरकार ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और समस्याओं के समाधान का ठोस आश्वासन दिया है। सरकार के इस नरम रुख के बाद ही अधिकारियों ने काम पर लौटने पर सहमति जताई। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हड़ताल के दौरान जमा हुए बैकलॉग को जल्द से जल्द खत्म करना और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को समय पर पूरा करना होगा।