पोते के जन्मदिन के पहले लालू को बड़ा झटका, तेजस्वी का साथ छोड़ भाजपा की हुई रितु जायसवाल
पोते के जन्मदिन की खुशियों के बीच लालू यादव को बड़ा झटका है. कभी तेजस्वी यादव की सबसे विश्वासपात्र महिला नेताओं में एक रितु जायसवाल ने राजद छोड़ अब भाजपा का दामन थाम लिया है.
Ritu Jaiswal : लालू यादव और तेजस्वी यादव को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तेजतर्रार नेता और कभी लालू-तेजस्वी यादव की करीबी मानी जाने वाली ‘मुखिया दीदी’ रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने जा रही हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में टिकट कटने के बाद पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहीं रितु जायसवाल मंगलवार, 26 मई को पटना स्थित भाजपा कार्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा की सदस्यता लेंगी। रितु जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने इस राजनीतिक फैसले की जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि वह दोपहर 12:19 बजे से 1:09 बजे के बीच आयोजित कार्यक्रम में “सादगीपूर्ण एवं गरिमामय तरीके” से भाजपा में शामिल होंगी।
अपने पोस्ट में उन्होंने देश की वर्तमान परिस्थितियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा एवं ईंधन बचत पर दिए जा रहे जोर का उल्लेख करते हुए समर्थकों से अपील की कि वे अनावश्यक भीड़ और लंबे काफिलों से बचें। रितु ने कहा कि राजनीति उनके लिए “सेवा, जिम्मेदारी और विचार का माध्यम” है, न कि प्रदर्शन का। उन्होंने समर्थकों से सार्वजनिक परिवहन या शेयरिंग वाहन के इस्तेमाल की अपील भी की।
जदयू से सियासी सफर
रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर जदयू से शुरू हुआ था। बाद में वह राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हुईं, जहां उन्हें महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी प्रवक्ता जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलीं। 2021 से 2023 तक वह राजद की प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहीं और टीवी डिबेट्स में पार्टी का मुखर पक्ष रखती थीं।
दो बार राजद से टिकट
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से मामूली अंतर से हारने के बावजूद लालू परिवार का भरोसा उन पर कायम रहा। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जदयू की लवली आनंद को कड़ी टक्कर दी। रितु करीब 4.47 लाख वोट हासिल करने में सफल रहीं, हालांकि लगभग 29 हजार वोटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
राजद उम्मीदवार को दिया झटका
लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट कटना उनके और राजद नेतृत्व के बीच दूरी की बड़ी वजह बना। पार्टी ने इस सीट से वरिष्ठ नेता रामचंद्र पूर्वे की बहू को उम्मीदवार बनाया, जिससे नाराज होकर रितु ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने करीब 64 हजार वोट हासिल किए, जिसका सीधा नुकसान राजद को उठाना पड़ा और पार्टी को सीट गंवानी पड़ी। बाद में राजद ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
मिथिलांचल में बड़ा चेहरा
अब भाजपा में शामिल होने जा रहीं रितु जायसवाल का यह कदम बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे राजद के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं, क्योंकि रितु मिथिलांचल की सक्रिय और प्रभावशाली महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।