राजद का बिहार की एनडीए सरकार पर बड़ा हमला, कहा-बिहार की जनता का जिंदा ही नहीं मरने के बाद भी उनके परिजनों का काट रही जेब

बिहार की सियासत में पटना के ऐतिहासिक बांसघाट श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। RJD ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से राज्य की एनडीए सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए बड़ा आरोप लगाया है

राजद का बिहार की एनडीए सरकार पर बड़ा हमला- फोटो : रंजन कुमार

Patna : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट साझा कर बिहार की एनडीए (NDA) सरकार पर तीखा हमला बोला है। आरजेडी ने राज्य सरकार को "बेईमानों और अपराधियों की लुटेरी सरकार" बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और उसकी सहयोगी दल जनता का वोट चुराकर सत्ता में आए हैं। पोस्ट में कहा गया है कि यह सरकार न केवल बिहार के लोगों के जिंदा रहने पर, बल्कि उनके मरने के बाद भी परिजनों की जेब काटने का काम कर रही है।


89 करोड़ का श्मशान घाट मात्र 1 रुपये की लीज पर

विपक्ष ने पटना के ऐतिहासिक बांसघाट श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरजेडी का दावा है कि पटना के बांसघाट में जनता के टैक्स के पैसे से 89 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक आधुनिक और नया श्मशान घाट तैयार किया गया था। आरोप है कि इस नवनिर्मित सरकारी श्मशान घाट को राज्य सरकार ने जग्गी वासुदेव (सदगुरु) की संस्था 'ईशा फाउंडेशन' को मात्र 1 रुपये की टोकन लीज पर सौंप दिया है।


अंतिम संस्कार के शुल्क में भारी बढ़ोतरी का दावा

आरजेडी ने इस कथित निजीकरण के बाद आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का ब्योरा भी साझा किया है। पोस्ट के अनुसार, ईशा फाउंडेशन को कमान मिलने के बाद अब इस नए श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए न्यूनतम शुल्क 3500 रुपये तय कर दिया गया है। विपक्ष ने इसकी तुलना पास के ही पुराने सरकारी श्मशान घाट से की है, जहां अंतिम संस्कार के लिए केवल 300 रुपये देने पड़ते हैं।


अतिरिक्त खर्चों को लेकर आम जनता की बढ़ी चिंता

विपक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि 3500 रुपये की यह राशि केवल बुनियादी सुविधाओं या पंजीकरण के लिए है। इसके अलावा यदि कोई परिजन अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी या गैस (दाह संस्कार प्रणाली) का उपयोग करता है, तो उसका खर्च पूरी तरह से अलग से देना होगा। आरजेडी ने इसे "चंदा चोर बीजेपी पार्टी" की नीति बताते हुए कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई से बनी सरकारी सुविधाओं को अब धीरे-धीरे निजी हाथों में बेचा जा रहा है।


बिहार की सियासत में गरमाया निजीकरण का मुद्दा

श्मशान घाट के प्रबंधन को एक निजी संस्था को सौंपने के इस मामले ने बिहार की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। आरजेडी इस मुद्दे को सीधे जनता की जेब और उनकी धार्मिक भावनाओं से जोड़कर भुनाने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि आरजेडी के इन गंभीर आरोपों पर सत्ताधारी दल भाजपा और जदयू (JDU) की तरफ से क्या सफाई या प्रतिक्रिया सामने आती है।


रंजन की रिपोर्ट