बांकीपुर उपचुनाव के झटके से RJD में खलबली, बदल सकता है प्रदेश अध्यक्ष, संगठन में फेरबदल की तैयारी, चार नामों पर चर्चा तेज
Bihar Politics: बांकीपुर उपचुनाव के झटके और पार्टी के भीतर से उठ रही असंतोष की आवाजों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़े संगठनात्मक फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। ...
Bihar Politics: बांकीपुर उपचुनाव के झटके और पार्टी के भीतर से उठ रही असंतोष की आवाजों के बीच राष्ट्रीय जनता दल में बड़े संगठनात्मक फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को साधने और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद के बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को बदले जाने की अटकलें भी जोर पकड़ रही हैं। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के भीतर जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें कुमार सर्वजीत, आलोक मेहता, शिवचंद्र राम और रणविजय साहू प्रमुख बताए जा रहे हैं। कुमार सर्वजीत को तेजस्वी यादव का भरोसेमंद और अनुशासित चेहरा माना जाता है। वहीं आलोक मेहता पार्टी के अनुभवी नेता और ओबीसी चेहरे के तौर पर मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। शिवचंद्र राम की संगठन में अच्छी पकड़ बताई जाती है, जबकि रणविजय साहू को भी सांगठनिक क्षमता के लिए जाना जाता है।
RJD की नई प्रदेश कमेटी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि तेजस्वी यादव संगठन में किस तरह का संतुलन कायम करते हैं। चर्चा है कि नई टीम बनाते समय लालू परिवार और पार्टी के पुराने समर्थकों की भावनाओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
हाल के दिनों में सारण जिले के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव को छह वर्षों के लिए निष्कासित किए जाने के बाद लालू परिवार की सदस्य रोहिणी आचार्य की नाराजगी भी सामने आई थी। रोहिणी ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि सच बोलने और ईमानदारी से काम करने वालों पर कार्रवाई हो रही है। उनका जोर पार्टी में पुराने ‘लालूवादियों’ को तरजीह देने पर रहा है।
उधर, तेजप्रताप यादव भी परिवार से दूरी को लेकर अपनी भावनाएं सार्वजनिक कर चुके हैं। ऐसे में संगठन में फेरबदल के दौरान परिवार के भीतर के मतभेद और भावनाओं को नजरअंदाज करना तेजस्वी के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि, पार्टी नेतृत्व के सामने दूसरी चुनौती यह भी है कि संगठन में ऐसे चेहरों को जगह दी जाए जिन पर नेतृत्व पूरी तरह भरोसा कर सके।
प्रदेश अध्यक्ष बदलने की संभावित कवायद केवल चेहरे में बदलाव तक सीमित नहीं होगी। तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन में नाराजगी को थामने, पुराने नेताओं को साथ रखने और युवा नेतृत्व के बीच बढ़ती खींचतान को नियंत्रित करने की होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि RJD की नई टीम में किसे जगह मिलती है और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन नया चेहरा बैठता है।
रिपोर्ट- रंजन कुमार सिंह