बिहार में संविदाकर्मियों के नाम पर 'उर्मिला' कंपनी मालामाल, हर महीने करोड़ों की लूट, राजद MLC का सदन में खुलासा

संविदाकर्मियों के नाम पर ' बिहार के खजाने से हर महीने सैंकड़ों करोड़ की लूट का मामला राजद एमएलसी सौरभ कुमार ने मंगलवार को बिहार विधान परिषद में उठाया.

RJD MLC Saurabh- फोटो : news4nation

Bihar Vidhn Parishad : बिहार में संविदा पर बहाल कर्मियों के नाम पर हर महीने करोड़ों रुपए का बंदरबाट हो रहा है. यह दावा मंगलवार को बिहार विधान परिषद में राजद एमएलसी सौरभ कुमार ने किया. उन्होंने सदन में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संविदा कर्मियों के नाम पर सेवा और कम्प्यूटर रेंट तथा चार्ज से हर महीने राज्य के खजाने को पहुंचाए जा रहे नुकसान का विवरण पेश किया. इसमें उर्मिला इंटरनेशनल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को हर महीने करोड़ों रुपए का लाभ पहुँचाने का दावा किया गया. 


एमएलसी सौरभ ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति और उर्मिला इंटरनेशनल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के बीच करार हुआ है. इसमें बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि डेटा मैनेजमेंट यूनिट में ऑपरेटर के भुगतान के लिए 19 हजार 668 रुपए लिया जाता है. वहीं कम्प्यूटर रेंट के लिए प्रति महीना 1890 रुपए और सर्विस चार्ज प्रति महीना 1170 रुपए का भुगतान होता है. यानी प्रति महीने एक ऑपरेटर और कम्प्यूटर के लिए 26 हजार 819 रुपए उर्मिला इंटरनेशनल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को दिया जाता है. 


उन्होंने दावा किया कि  उर्मिला इंटरनेशनल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड इसके उलट सिर्फ 13 हजार 911 रुपए ही ऑपरेटर को भुगतान करता है. इसी प्रकार नया कम्प्यूटर भी 30 हजार से 40 हजार रुपए तक आ जाता है. लेकिन उर्मिला हो सिर्फ कम्प्यूटर रेंट और सर्विस चार्ज के लिए ही सालाना 36 हजार 720 रुपए का भुगतान किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि हर महीने करोड़ों रुपए सिर्फ स्वास्थ्य विभाग से उर्मिला नामक एजेंसी एग्रीमेंट की आड़ में अवैध तरीके से कमाती है. वहीं राज्य में अन्य विभागों में भी लाखों की संख्या में संविदा कर्मी के नाम पर पैसे का बंदरबाट हो जाता है. 


सौरभ ने कहा कि जब एक ऑपरेटर को करीब 14 हजार ही मिलता है तो इससे बेहतर राज्य सरकार अपने स्तर से ऐसे कर्मियों को बहाल करे ताकि सरकारी खजाने से उर्मिला इंटरनेशनल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की जा रही लूट खत्म की जाए.