मोतिहारी मामले में राजद सांसद सुधाकर सिंह का राज्य सरकार पर तीखा हमला, खुद पर दर्ज FIR को बताया फर्जी
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने मोतिहारी जिले के पिपराकोठी मामले को लेकर उनके उपर हुए एफआरआई को लेकर सीधे-सीधे प्रदेश की सम्राट सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एफआईआर को फर्जी करार देते हुए सीएम सम्राट के कई सवालों का जवाब मांगा है....
Patna : बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के पिपराकोठी में किसानों की भूमि पर सरकार द्वारा जबरन कृत्रिम वाटर पार्क बनाए जाने के विरोध में आयोजित एक किसान सभा को संबोधित करने के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस शांतिपूर्ण सभा में शामिल होने के कारण स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सांसद सुधाकर सिंह, उनके सहयोगियों शाश्वत गौतम, सुबोध यादव, रवीन्द्र सहनी, शमशाद आलम सहित कुल 24 लोगों के खिलाफ पिपराकोठी थाने में कांड संख्या 361/26 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस प्राथमिकी में हत्या की कोशिश, लूटपाट और ₹35,000 की पॉकेटमारी जैसे कई संगीन और अजीबोगरीब आरोप लगाए गए हैं, जिसने सूबे की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुए सांकेतिक प्रदर्शन पर खड़े किए सवाल
सांसद सुधाकर सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और मनगढ़ंत बताते हुए पूरे घटनाक्रम का समयबद्ध ब्यौरा सार्वजनिक किया है। उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे सभा को संबोधित करने के बाद, दोपहर 12:30 बजे किसानों की जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मोतिहारी सदर-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पिपराकोठी थानाध्यक्ष समेत सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल, मीडियाकर्मी और आम जनता वहां खुद मौजूद थी। सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल उठाया कि यदि पुलिस अधिकारियों के सामने ही लूटपाट और गला दबाकर हत्या के प्रयास जैसी संगीन वारदात हो रही थी, तो प्रशासन ने उसी वक्त कोई त्वरित कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी क्यों नहीं की।
प्रोटोकॉल के उल्लंघन और बिना मजिस्ट्रेट हिरासत में रखने का आरोप
सांसद ने स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े करते हुए कहा कि सभा स्थल पर जिला मुख्यालय से भेजी गई पुलिस बल की एक कंपनी ने उन्हें बिना किसी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी के करीब 1 घंटे तक अवैध रूप से रोककर रखा। उनके द्वारा बार-बार आधिकारिक मांग किए जाने के बावजूद मौके पर कोई दंडाधिकारी नहीं पहुंचा, जो स्थापित कानून-व्यवस्था और एक जनप्रतिनिधि के विशेषाधिकार (प्रोटोकॉल) का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद दोपहर 3 बजे उन्होंने खुद मोतिहारी के जिला अधिकारी सौरभ सुमन यादव से मिलकर किसानों के पक्ष में एक ज्ञापन सौंपा और शाम को सर्किट हाउस में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिससे साबित होता है कि पूरा मामला प्रशासनिक दबाव में दर्ज कराया गया है।
95 साल पुरानी वैध जमाबंदी को रद्द करने पर तीखा विरोध
सांसद ने कहा कि पिपराकोठी (खाता संख्या 156, खेसरा संख्या 507) की यह उपजाऊ भूमि पिछले लगभग 95 वर्षों से स्थानीय खेतिहर किसानों के शांतिपूर्ण कब्जे में है, जिसकी मूल जमाबंदी वर्ष 1931-32 में कायम हुई थी। किसान नियमित रूप से इस भूमि का सरकारी लगान भी चुकाते आ रहे हैं, लेकिन सरकार ने मात्र 3 महीने के भीतर इस वैध जमाबंदी को अचानक रद्द कर वहां कृत्रिम वाटर पार्क बनाने की तत्परता दिखाई है। सांसद ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मोतिहारी में पहले से ही 400 एकड़ में फैली प्राकृतिक "मोती झील" मौजूद है, ऐसे में किसानों की कीमती जमीन छीनकर "पिकनिक स्पॉट" बनाने की यह प्रशासनिक जिद पूरी तरह हास्यास्पद और जनविरोधी है।
शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा बनाम वाटर पार्क की तत्परता पर राज्यव्यापी आंदोलन का एलान
सांसद सुधाकर सिंह ने सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोलते हुए तुलना की कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए आवश्यक 39 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पिछले 12 वर्षों से लंबित है। इसी तरह, जमीन न मिलने के कारण तकनीकी संस्थान 'सिपेट' (CIPET) मोतिहारी से भागलपुर चला गया और केंद्रीय विद्यालय पिछले 23 वर्षों से एक अस्थायी स्टेडियम में चलने को मजबूर है। शिक्षा और रोजगार से जुड़े इन महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए सरकार के पास जमीन नहीं है, लेकिन वाटर पार्क और भाजपा सांसद राधामोहन सिंह के संरक्षण में भू-माफियाओं के लिए प्रशासन पूरी ताकत झोंक रहा है। सांसद ने एलान किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की आड़ में की जा रही इस प्रशासनिक गुंडागर्दी के खिलाफ अब पूरे बिहार में एक व्यापक और ऐतिहासिक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
नरोत्तम की रिपोर्ट