Bihar Tender Scam: बिहार टेंडर घोटाला मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी रिशु श्री की जमानत याचिका खारिज

बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में पटना की विशेष निगरानी अदालत से बड़ी खबर आ रही है। विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने मामले की आरोपी रिशु श्री को राहत देने से साफ इनकार करते हुए उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

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पटना की विशेष निगरानी अदालत द्वारा आरोपी रिशु श्री की नियमित जमानत याचिका खारिज- फोटो : news 4 nation

बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में पटना की विशेष निगरानी अदालत से एक बड़ी खबर सामने आई है। मामले की संवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की मुख्य आरोपियों में से एक, रिशु श्री की नियमित जमानत याचिका (Regular Bail Plea) को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत के इस सख्त रुख से घोटाला माफियाओं में हड़कंप मच गया है।


आरोपी तारिणी दास की जमानत पर सुनवाई पूरी, अदालत ने सुरक्षित रखा फैसला

इसी टेंडर घोटाला मामले के एक अन्य प्रमुख आरोपी तारिणी दास की जमानत याचिका पर भी अदालत में विस्तृत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों (अभियोजन और बचाव पक्ष) की दलीलों और पेश किए गए दस्तावेजों को देखने के बाद, विशेष अदालत ने अपनी सुनवाई पूरी कर ली है। हालांकि, अदालत ने तारिणी दास की जमानत पर तत्काल कोई आदेश न देकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर आने वाले दिनों में आदेश जारी किया जाएगा।


रिशु श्री को नहीं मिली राहत, न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा

निगरानी ब्यूरो (Vigilance Bureau) द्वारा टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी राजस्व को चूना लगाने के पुख्ता सबूत पेश किए जाने के बाद अदालत ने रिशु श्री को कोई भी राहत देने से साफ इनकार कर दिया। जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब आरोपी रिशु श्री को फिलहाल जेल (न्यायिक हिरासत) में ही रहना होगा। जांच एजेंसी का मानना है कि आरोपियों को जमानत मिलने से केस के गवाहों और सबूतों को प्रभावित किया जा सकता था।


मामले की गहन जांच जारी, कई बड़े चेहरों पर कानून का शिकंजा

करोड़ों रुपये के इस बहुचर्चित टेंडर घोटाले ने बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में पहले ही खलबली मचा रखी है। निगरानी विभाग की विशेष टीम इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए लगातार छापेमारी और कड़ाई से पूछताछ कर रही है। कानूनविदों का कहना है कि निगरानी अदालत के इस कड़े फैसले के बाद आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कई अन्य रसूखदार और बड़े चेहरों पर भी कानून का शिकंजा और कस सकता है।