Rebellion within the RJD: राष्ट्रीय जनता दल में बगावत की गूंज! रोहिणी आचार्य ने अपनी ही पार्टी पर बोला सियासी हमला, नेताओं पर लगाए गंभीर इल्ज़ाम, कहा- ‘हिम्मत है तो पहले मुझ पर कार्रवाई करो’
Rebellion within the RJD: राष्ट्रीय जनता दल के अंदर सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपनी ही पार्टी के फैसले के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए संगठन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। ...
Rebellion within the RJD: राष्ट्रीय जनता दल के अंदर सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपनी ही पार्टी के फैसले के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए संगठन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। सारण के राजद प्रवक्ता हरेलाल यादव को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए रोहिणी ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर लंबी पोस्ट साझा की और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर सीधे निशाना साध दिया।
उन्होंने लिखा है कि क्या पार्टी की भलाई के लिए सच बोलने , पार्टी के लिए मजबूती एवं ईमानदारी से काम करने वालों के लिए अब जगह नहीं बची है राष्ट्रीय जनता दल में ? . अनुशासनहीनता के झूठे आरोप गढ़ कर सारण के प्रवक्ता श्री हरेलाल यादव का छहः वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासन उन लोगों के द्वारा की गयी दुर्भाग्यपूर्ण कार्रवाई है , जो पार्टी को लगातार कमजोर कर रहे हैं , पार्टी में रहते हुए पार्टी और संगठन के साथ विश्वासघात कर रहे हैं ...
सारण का पूरा जिला संगठन वैसे लोगों के कब्जे में है जो कहने को तो पार्टी में हैं , मगर हकीकत में विरोधियों के इशारे पर काम करते हैं, चुनाव में पार्टी विरोधी काम करते हैं .. सारण का हर एक विधायक , हर पार्टी पदाधिकारी पूरी तरह से निष्क्रिय है और जो लोग पार्टी की भलाई के लिए जनता के बीच जाते हैं , पार्टी से जुड़े लोगों - कार्यकर्ताओं - समर्थकों के सुख - दुःख को साझा करते हैं , उनको ही ये निष्क्रिय एवं साजिश करने वाले लोग टारगेट करते हैं ..
संजय यादव या उसके ही जैसे लोगों पर सवाल उठाने वालों पर ही अगर कार्रवाई करनी है , तो सबसे पहले मुझ पर कार्रवाई करने की हिम्मत जुटाएं , मैं आज भी पार्टी में हूँ और पार्टी को संजय यादव , रमीज, सुनील सिंह जैसे लोगों के चुंगल से छुड़ाने के लिए लगातार अपनी आवाज उठा रही हूँ , आगे भी उठाती रहूँगी , मैं लालू जी की बेटी हूँ कभी गलत के सामने घुटने नहीं टेकूँगी और मेरा साथ देने वाले लोग भी किसी निष्कासन की कार्रवाई की परवाह किए बिना मेरे साथ मजबूती से खड़े ही रहेंगे ..
फिर से दुहराती हूँ नाहक ही किसी निर्दोष, ईमानदार, जमीनी कार्यकर्त्ता , जिला स्तर के किसी पदाधिकारी को टारगेट किया जाना सरासर गलत और पार्टी के हित में नहीं है ..
रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में लिखा कि क्या अब राजद में सच बोलने वालों और पार्टी की भलाई के लिए ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं बची है? उन्होंने आरोप लगाया कि हरेलाल यादव पर अनुशासनहीनता के कथित आरोप लगाकर उन्हें सियासी साज़िश के तहत बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई उन लोगों के इशारे पर हुई है जो खुद संगठन को अंदर से कमजोर कर रहे हैं।
अपने बयान में रोहिणी ने संजय यादव, सुनील सिंह और रमीज का नाम लेते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ये नेता संगठन के साथ वफ़ादारी निभाने के बजाय पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। रोहिणी ने यह भी कहा कि सारण का जिला संगठन ऐसे लोगों के प्रभाव में आ गया है, जो राजद में रहते हुए भी विरोधियों के इशारों पर काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान भी कुछ लोग कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहते हैं।
रोहिणी ने सारण के विधायकों और कई पदाधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जो कार्यकर्ता जनता के बीच रहकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश करते हैं, उन्हीं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा कि यदि संजय यादव जैसे नेताओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी है, तो सबसे पहले उन पर कार्रवाई की जाए।पोस्ट के अंत में रोहिणी ने स्पष्ट किया कि वह पार्टी को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने वाले लोगों के प्रभाव से मुक्त कराने के लिए अपनी आवाज़ उठाती रहेंगी। उन्होंने कहा कि वह लालू प्रसाद यादव की बेटी हैं और गलत के सामने कभी झुकेंगी नहीं। रोहिणी के अनुसार, किसी ईमानदार और जमीनी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करना न केवल अनुचित है, बल्कि पार्टी के भविष्य के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है।रोहिणी आचार्य के इस सार्वजनिक बयान ने राजद के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। अब सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और संगठन के भीतर उठे इन सवालों का जवाब किस तरह देता है।