Bihar Road Construction News:निविदा विवाद पर सरकार का पलटवार, सड़क निर्माण टेंडर में बदलाव के आरोपों पर पथ निर्माण विभाग की दो टूक, विपक्ष के सवालों के बीच जारी की सफाई
Bihar Road Construction News: निविदा विवाद पर पथ निर्माण विभाग का कहना है कि किसी भी प्रकार का अवांछित या पक्षपातपूर्ण संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि तकनीकी और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप प्रावधानों को शामिल किया गया है।...
Bihar Road Construction News: बिहार की राजनीति में इन दिनों सड़क निर्माण और निविदा प्रक्रिया को लेकर नई बहस छिड़ गई है। पथ निर्माण विभाग की ओर से जारी एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण ने उस विवाद को नया मोड़ दे दिया है, जिसमें लॉन्ग टर्म आउटपुट एंड परफॉर्मेंस बेस्ड रोड एसेट्स मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (ओपीआरएमसी-थर्ड) की निविदा शर्तों में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। मीडिया में प्रकाशित खबरों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का अवांछित या पक्षपातपूर्ण संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि तकनीकी और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप प्रावधानों को शामिल किया गया है।
विभाग के अनुसार, समान प्रकृति के बिटुमिनस कार्यों में बिटुमिनस कोल्ड मिक्स कार्य को भी मान्य माना गया है। यदि किसी विशेष पैकेज में कोल्ड मिक्स तकनीक का उपयोग किया जाना है, तो निविदा दस्तावेज में उसके लिए आवश्यक अनुभव और तकनीकी अर्हता को अलग से शामिल करना अनिवार्य है। विभाग का कहना है कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं बल्कि कार्य की प्रकृति के अनुरूप तय किया गया तकनीकी प्रावधान है।
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने निविदा शर्तों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए थे और आशंका जताई थी कि इससे कुछ खास एजेंसियों या संवेदकों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि विभाग ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, नियमसम्मत और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की जा रही है।
दरअसल, रोहतास और कैमूर के वन्यप्राणी आश्रयणी क्षेत्रों के साथ-साथ मुंगेर के भीमबांध वन्यजीव क्षेत्र में सड़क निर्माण और संधारण कार्यों के लिए विशेष तकनीक अपनानी पड़ती है। पर्यावरणीय नियमों के तहत इन इलाकों में आग का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में पारंपरिक हॉट मिक्स तकनीक की जगह बिटुमिनस कोल्ड मिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य हो जाता है। यही वजह है कि भभुआ, डेहरी ऑन सोन और मुंगेर पथ प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले वन पथों के लिए विशेष अनुभव रखने वाले संवेदकों की पात्रता सुनिश्चित की गई है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि बिटुमिनस कोल्ड मिक्स कार्य के लिए अलग प्रकार के प्लांट, मशीनरी और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। इसलिए वन्यप्राणी अंचल पटना द्वारा दी गई सशर्त अनुमति के अनुरूप निविदा में विशिष्ट अनुभव को पात्रता की अनिवार्य शर्त बनाया गया है। इसका उद्देश्य किसी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि कार्य की गुणवत्ता और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ओपीआरएमसी-थर्ड योजना के तहत राज्यभर में 100 पैकेजों की राष्ट्रीय स्तर पर निविदा जारी की गई है, जबकि बिटुमिनस कोल्ड मिक्स तकनीक केवल तीन पैकेजों में शामिल है। ऐसे में विभाग का तर्क है कि पूरे टेंडर ढांचे को विवादित बताना तथ्यों से परे है।
बहरहाल यह मामला केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष जहां इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार और विभाग इसे तकनीकी आवश्यकता और पर्यावरणीय बाध्यता का मामला बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सत्ता और विपक्ष के बीच एक नए राजनीतिक संघर्ष का आधार बन सकता है, लेकिन फिलहाल विभाग ने अपनी सफाई देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि विकास कार्यों और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलित नीति के तहत ही निर्णय लिए जा रहे हैं।