भरत तिवारी एनकाउंटर: CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे न्यायिक जांच
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। बढ़ते जन आक्रोश और निष्पक्षता के दावों के बीच बिहार सरकार ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और संदेहास्पद पहलुओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी ताकि किसी भी तरह का भ्रम या आशंका न रहे।
अपनों के ही निशाने पर पुलिस: सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने उठाए गंभीर सवाल
इस एनकाउंटर की सबसे खास और हैरान करने वाली बात यह रही कि विपक्ष से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े होने लगे। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने घटना से जुड़े वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला कई गहरे संदेह पैदा करता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महज चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देना इस मामले में काफी नहीं है, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी वर्दीवाले ने कानून हाथ में लिया है, तो उसके खिलाफ भी उतनी ही कठोर कार्रवाई हो जो एक अपराधी के खिलाफ की जाती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री भी आए सामने: सरेंडर के बाद गोली मारने की थ्योरी पर जताई आपत्ति
सत्तारूढ़ खेमे से ही कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भी इस मुठभेड़ को लेकर पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि जब विभिन्न वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था और वह निहत्था हो चुका था, तो फिर पुलिस को उस पर गोलियां चलाने की क्या आवश्यकता आ पड़ी? उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छिपी असली सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए ताकि खाकी की साख पर लगे इस दाग का सच पता चल सके।
बिहार से झारखंड तक सियासी गूंज: विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने घेरा
भरत तिवारी की मौत का यह मामला अब केवल भोजपुर या बिहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी सियासी गूंज पड़ोसी राज्य झारखंड तक पहुंच गई है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने सोशल मीडिया पर इस एनकाउंटर को लेकर बिहार की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल दागे। वहीं दूसरी ओर, अपने आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाने वाले पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी इस मामले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ बोलते हुए मृतक भरत तिवारी की तुलना शहीद भगत सिंह तक से कर दी।