सड़क सुरक्षा का महाकुंभ: मंत्री श्रवण कुमार करेंगे 'अभियान 2026' का आगाज़, राह-वीरों का बढ़ेगा मान

19 फरवरी को अधिवेशन भवन में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा अभियान 2026 का भव्य आयोजन होने जा रहा है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जहाँ दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने वाले 'गुड सेमेरिटन्स' और महिला बस चालकों को सम्मानित कर एक

बिहार में सड़क सुरक्षा को लेकर चल रहे जागरूकता अभियान का एक भव्य समापन और नए संकल्पों का आगाज़ होने जा रहा है। परिवहन विभाग और बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् की ओर से 19 फरवरी को पटना के अधिवेशन भवन में राज्य स्तरीय 'सड़क सुरक्षा अभियान 2026' कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष समारोह का विधिवत उद्घाटन परिवहन विभाग के मंत्री  श्रवण कुमार द्वारा किया जाएगा।

यह कार्यक्रम 1 जनवरी से 31 जनवरी तक पूरे राज्य में चलाए गए 'राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026' के सफल समापन का प्रतीक है। परिवहन सचिव श्री राज कुमार के अनुसार, यह केवल एक महीने के अभियान का अंत नहीं है, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदार सड़क संस्कृति की दिशा में एक नई शुरुआत है। समारोह का मुख्य उद्देश्य यातायात नियमों के प्रति आत्ममंथन करना और समाज को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करना है।

समारोह के दौरान मानवता की मिसाल पेश करने वाले 5 राह-वीरों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की त्वरित सहायता की है। इसके अतिरिक्त, पिंक बस सेवा की महिला चालकों को उनके साहसिक और प्रेरणादायी कार्य के लिए सम्मान प्रदान किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिला परिवहन पदाधिकारियों, मोटरयान निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत किया जाएगा।

जन-जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम में “परवाह करेंगे, सुरक्षित रहेंगे” रोड सेफ्टी एंथम और अन्य जागरूकता वीडियो का प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों और चिकित्सकों द्वारा अपने अनुभव साझा किए जाएंगे, ताकि आम नागरिक सड़क पर जान की बाजी लगाने के खतरों को समझ सकें। साथ ही, सरकार की कैशलेस उपचार योजना की जानकारी भी वीडियो के माध्यम से दी जाएगी।

आम नागरिकों की सुरक्षात्मक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए SDRF टीम द्वारा CPR और PHT का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। IDTR द्वारा ड्राइवरों, छात्रों और पैदल यात्रियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि आपात स्थिति में वे जीवनरक्षक की भूमिका निभा सकें। इस कार्यक्रम के जरिए संदेश दिया जाएगा कि यातायात नियमों का पालन केवल दंड से बचने के लिए नहीं, बल्कि अनमोल जीवन की रक्षा के लिए एक सामाजिक संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए।