खेतों को नीलगाय से बचाने के लिए 400 शूटर की तलाश, सर्पदंश से मौत पर 10 लाख मुआवजा, विधानसभा अध्यक्ष के एक आदेश से बदल जाएगी पूरी तस्वीर
नीलगाय द्वारा फसलों की बर्बादी और सर्पदंश से होने वाली मौतों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने ऐतिहासिक निर्देश दिए हैं। अब शूटरों की फौज बढ़ाई जाएगी और सांप को वन्यजीव घोषित कर मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की तैयारी शुरू हो गई है।
Patna - बिहार में फसलों को बचाने के लिए घोड़परास को मारने का कानून तो है, लेकिन शूटरों की भारी कमी के कारण यह प्रभावी नहीं हो पा रहा है। भाजपा विधायक रजनीश कुमार द्वारा उठाए गए इस मामले पर संज्ञान लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शूटरों की संख्या मौजूदा 13 से बढ़ाकर 400 करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आखेट (शिकार) की प्रक्रिया और शूटरों को मिलने वाली राशि का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि किसान इसका लाभ ले सकें।
कृषि विभाग निभाएगा 'समन्वयक' की भूमिका
बैठक में यह बात सामने आई कि किसानों को घोड़परास द्वारा बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिल रहा है। अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि कृषि विभाग इस मामले में समन्वयक की भूमिका निभाए और किसानों को मुआवजे की प्रक्रिया व राशि के बारे में विस्तार से जानकारी दे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि किसानों की शिकायतों का त्वरित निवारण हो सके।
सांप को वन्यजीव घोषित करने का निर्देश
बैठक का सबसे बड़ा निर्णय सर्पदंश (सांप के काटने) से होने वाली मौतों के मुआवजे को लेकर रहा। वर्तमान में आपदा प्रबंधन विभाग सर्पदंश पर 4 लाख रुपये मुआवजा देता है। भाजपा विधायक जीवेश कुमार के सवाल पर अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि सांप को वन्यजीव घोषित किया जाए। वन्यजीव से होने वाली मौत पर 10 लाख रुपये का प्रावधान है, अतः सांप के मामले में भी इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार और प्रधान उच्च वन संरक्षक प्रभात कुमार गुप्ता सहित कई आला अधिकारी मौजूद थे। बैठक में विधायकों ने जमीन पर आ रही समस्याओं को प्रमुखता से रखा, जिसके बाद अध्यक्ष ने अंतर्विभागीय समन्वय बेहतर करने पर जोर दिया।
समय सीमा के भीतर कार्रवाई की अपेक्षा
डॉ. प्रेम कुमार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शूटरों के चयन और मुआवजे के नियमों में संशोधन की प्रक्रिया को समय रहते पूरा किया जाए। इस बैठक में विधायक मिथिलेश तिवारी और विधानसभा की प्रभारी सचिव ख्याति सिंह भी शामिल थीं। सरकार के इन कदमों से न केवल किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश जैसी आपदाओं में पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।