रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा की शर्मनाक तस्वीर : प्लेटफॉर्म पर युवक ने सरेआम लगाई फांसी, तमाशबीन बना रहा सिस्टम

राउरकेला स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर मंगलवार सुबह एक युवक ने सरेआम फांसी लगाकर जान दे दी, जिससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

N4N Desk - चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले व्यस्त राउरकेला स्टेशन से सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। मंगलवार सुबह लगभग 11:40 बजे, प्लेटफॉर्म नंबर दो के झारसुगुड़ा एंड पर एक अज्ञात युवक ने सरेआम फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर दिनदहाड़े हुई इस घटना ने न केवल यात्रियों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के सुरक्षा दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। 

सरेआम मौत का मंजर, घंटों तक नहीं जागी पुलिस

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पहुंचा और वहां बने एक चबूतरे की मदद से शेड के लोहे के एंगल में रस्सी बांधकर फंदा तैयार किया। हैरानी की बात यह है कि युवक काफी देर तक वहां ये तैयारियां करता रहा और फंदे पर झूलने के बाद कुछ समय तक तड़पता भी रहा, लेकिन स्टेशन पर तैनात किसी भी सुरक्षाकर्मी की नजर उस पर नहीं पड़ी। यह घटना साबित करती है कि करोड़ों के बजट और आधुनिक कैमरों के बावजूद जमीनी स्तर पर निगरानी पूरी तरह शून्य है। 

आरपीएफ और जीआरपी की निष्क्रियता पर उठे सवाल

स्टेशन जैसे अति-संवेदनशील स्थान पर जहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का दावा किया जाता है, वहां एक युवक का सुसाइड कर लेना सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है। घटना के काफी देर बाद जब युवक की जान जा चुकी थी, तब सुरक्षाबल मौके पर पहुंचे और शव को नीचे उतारा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सीसीटीवी या गश्ती दल ने मुस्तैदी दिखाई होती, तो शायद उस युवक की जान बचाई जा सकती थी। 

अपराध का गढ़ बनता जा रहा है राउरकेला स्टेशन

चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्टेशन पर सुरक्षा का अभाव केवल इस घटना तक सीमित नहीं है। यहाँ लंबे समय से टिकट दलाली, गांजा तस्करी, अवैध शराब की बिक्री और मारपीट जैसी आपराधिक गतिविधियां फल-फूल रही हैं। मीडिया में मामला आने पर दिखावे की कार्रवाई तो होती है, लेकिन ठोस सुधार अब तक नदारद हैं। 

क्या तय होगी जवाबदेही?

राउरकेला स्टेशन की यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की विफलता का प्रमाण है। जिस जगह पर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की है, वहां खुलेआम मौत का खेल चलता रहा और प्रशासन सोया रहा। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर हर बार की तरह मामले को कागजी खानापूर्ति कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।