Bihar News : बिहार के ग्राम पंचायतों में RTPS सेवाओं की तेज हुई रफ्तार, 23 लाख से अधिक आवेदनों का हुआ निष्पादन, सिवान जिला बना अव्वल
PATNA : बिहार की ग्राम पंचायतों में संचालित आरटीपीएस (RTPS) केंद्रों पर लोक सेवाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। पंचायती राज विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन केंद्रों पर आवेदनों की संख्या में न केवल तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि उनका निष्पादन भी रिकॉर्ड समय में किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत से औसतन 296 आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जो जमीनी स्तर पर डिजिटल सेवाओं की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
पंचायती राज विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 18 जनवरी 2026 तक राज्य भर के आरटीपीएस केंद्रों पर कुल 23 लाख 82 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। विभाग की सक्रियता का आलम यह है कि इनमें से 23 लाख 10 हजार आवेदनों का निष्पादन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। लंबित आवेदनों की संख्या बेहद कम है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नागरिकों को प्रमाण पत्र और अन्य सेवाओं के लिए अब प्रखंड या जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
जिलों के प्रदर्शन की बात करें तो आवेदनों के निष्पादन के मामले में सिवान जिला पूरे प्रदेश में शीर्ष पर बना हुआ है। सिवान की 283 ग्राम पंचायतों से अब तक लगभग 2 लाख 32 हजार आवेदन मिले, जिनमें से 2 लाख 27 हजार का निपटारा कर दिया गया है। इसके बाद मधुबनी, जहानाबाद, खगड़िया और सीतामढ़ी जिले भी 'टॉप-5' में शामिल हैं। इन जिलों ने प्राप्त आवेदनों के सापेक्ष निष्पादन की दर को काफी ऊंचा रखा है, जिससे स्थानीय नागरिकों को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
इन केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ नागरिकों को एक ही छत के नीचे कुल 64 प्रकार की डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें जाति, आय, निवास, और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। इन केंद्रों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान आने वाली तकनीकी या प्रशासनिक शिकायतों का समाधान त्वरित गति से किया जाए।
निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाणपत्र जारी होना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सुशासन को मजबूती मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इन सेवाओं का और विस्तार किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। आरटीपीएस केंद्रों की इस सफलता ने बिहार के पंचायती राज मॉडल को सेवा वितरण के क्षेत्र में एक नई पहचान दी है।